Astrology Articles

  • इन तांत्रिक प्रयोगों से मां लक्ष्मी रहेंगी सदा प्रसन्न, कभी नहीं रूठेंगी
    भारतीय धर्म और संस्कृति में महादेवी लक्ष्मी की आराधना को विशेष महत्व दिया गया है। कमला, रमा, पद्मा, पदमवासा, विष्णुप्रिया आदि नामो से लोकप्रिय लक्ष्मी जी को सुख, संपदा और धन प्रदान करने वाली माना गया है। कमल पुष्प पर आसीन देवी लक्ष्मी के दो हाथो में कमल सुशोभित हैं, वही बाये हाथ से वो धन वर्षा करती हे तो दाहिने हाथ से अपने भक्तो को शुभ आशीर्वाद प्रदान करती हैं। आगम ग्रंथ में लक्ष्मी जी को दो भुजा वाली दर्शाते हुए स्वर्णिम आभा वाले कमल पुष्प पर विराजमान होना बताया गया है। देवी लक्ष्मी के दोनो नेत्र कमल के समान हैं तथा दोनो कानो में मकर की आकृति के रत्न जडित कुंडल सुशोभित हैं। मां लक्ष्मी को रिझाने और उन्हें वश में करने के कुछ शास्त्रों में नियम बताए गए हैं-....

  • आज राधारानी का है जन्‍मदिन, इनको करें प्रसन्न, श्री कृष्णा भर देंगे झोली
    भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि ;यानी कि आज श्री कृष्ण की प्राणप्रिया राधाजी का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार राधाजी भी श्री कृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं। वे बृज में वृषभानु वैश्य की कन्या हुईं । उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ बल्कि माता कीर्ति ने अपने गर्भ में  वायु को धारण कर रखा था और योगमाया की प्रेरणा से कीर्ति ने वायु को जन्म दिया। लेकिन वायु के जन्म के साथ ही वहां राधा, कन्या के रूप में प्रकट हो गईं इसलिए श्री राधा रानी को देवी अयोनिजा कहा जाता है। बारह वर्ष बीतने पर उनके माता-पिता ने रायाण वैश्य के साथ उनका सम्बन्ध निश्चित कर दिया। उस समय श्री राधा घर में अपनी छाया को स्थापित करके स्वयं अंतर्धयान हो गईं। उस छाया के साथ ही उक्त रायाण का विवाह हुआ। शास्त्रों की मानें तो ब्रह्माजी ने पुण्यमय वृन्दावन में श्री कृष्ण के साथ साक्षात राधा का विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया था। कहते हैं इन्‍हें प्रसन्‍न करने से भगवान श्रीकृष्‍ण प्रसन्‍न होकर सभी मनचाही इच्‍छाएं पूरी करते हैं।....

  • ऐसा भोजन करने से होंगे सभी ग्रह अनुकूल, मिलने लगेगी दौलत और शोहरत
    श्रीमद्भगवद् गीता के सत्रहवें अध्याय में भोजन के तीन प्रकारों, सात्विक, राजसिक एवं तामसिक का उल्लेख मिलता है। सात्विक आहार शरीर के लिए लाभकारी होते हैं और आयु, गुण, बल, आरोग्य तथा सुख की वृद्धि करते हैं। इस प्रकार के आहार में गौ घृत, गौ दुग्ध, मक्खन, बादाम, काजू, किशमिश आदि मुख्य हैं। राजसिक भोजन कड़वे, खट्टे, नमकीन, गरम, तीखे व रूखे होते हैं। इनके सेवन से शरीर में दुःख, शोक, रोग आदि उत्पन्न होने लगते हैं। इमली, अमचूर, नीबू, छाछ, लाल मिर्च, राई जैसे आहार राजसिक प्रकृति के माने गए हैं। कहते हैं कि सात्विक भोजन करने से सभी ग्रह अनुकूल होने लगते हैं और दौलत और शोहरत पाने के योग बनने लगते हैं।....

  • इस धातु की माला से जप करो, नहीं रहेगी पैसों की कमी
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्फटिक को धन की देवी लक्ष्मी जी का स्वरुप माना गया है, जिसे कंठ हार अर्थात माला के रूप में धारण किया जाता है। स्फटिक निर्मल, रंगहीन, पारदर्शी और शीत प्रभाव रखने वाला उप-रत्न है। आयुर्वेद में स्फटिक का प्रयोग सभी प्रकार के ज्वर, पित्त प्रकोप, शारीरिक दुर्बलता एवं रक्त विकारों को दूर करने के लिए शहद अथवा गौ मूत्र के साथ औषधि के रूप में किया जाता है।....

  • इस देव की उपासना से होंगे रोजगार के दोष दूर, नहीं आएगी कोई प्रेतबाधा
    यूं तो सभी 36 करोड देवी-देवता को स्मरण करना संभव नहीं है लेकिन उनमें से कुछ खास देवों का स्म रण और आराधना करने से न केवल रोजगार संबंधी सभी परेशानियां दूर होती हैं, बल्कि आरे-तारे-उतारों से जुडी सभी समस्यानएं दूर होती जाती हैं। कहते हैं कि श्री हनुमानजी की विधि-विधान और श्रद्धा भाव से उपासना सर्व कल्याणकारी है। मनोवांछित फल प्राप्त करने और दुःख, कष्ट, बाधा एवं भूत-प्रेत के प्रकोप से बचने के लिए श्री हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए। ....

  • मूलांक के अनुसार वाहन खरीदने से बदल सकती है आपकी किस्मत
    वाहन (कार, स्कूटर, बाइक, बस, टैम्पो इत्यादि) का रजिस्ट्रेशन नंबर तथा रंग आपके लिए शुभ रहे यह अंक ज्योतिष से मूलांक के आधार पर जान सकते हैं। अंक ज्योतिष में मूलांक जन्म तारीख को कहते हैं। जैसे 19 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 1 प्लीस 9=10 अर्थात एक होगा। वाहन अंक जानने के लिए वाहन के रजिस्ट्रेशन नम्बरों को जोड़कर इकाई में परिवर्तित करते हैं जैसे वाहन संख्या 5674 (5 प्लस 6 प्लस 7 प्लस 4 =22=2 प्लस 2 = 4) नम्बर का अंक 4 बनेगा। मूलांक स्वामी के आधार पर शुभ वाहन अंक एवं रंग का निर्धारण इस प्रकार करें।....

  • क्या आप श्राद्ध के पीछे का सच जानते हैं
    याज्ञवल्क्य का कथन है कि रीति रिवाज के अनुसार कराए गए श्राद्ध कर्म से तृप्त होकर श्राद्ध देवता श्राद्ध कर्त्ता एवं उसके वंशजों को दीर्घ जीवन, आज्ञाकारी संतान, धन विद्या, सुख समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं, उन्हें स्वर्ग तथा दुर्लभ मोक्ष भी प्रदान करते हैं। ....

  • राहु-केतु-शनि यानी राकेश के कुप्रभावों से बचने के परखे हुए उपाय
    जीवन में शांति बनाए रखने के लिए राकेश को मनाकर रखना होता है, राकेश यानी कि राहु-केतु और शनि। कहते हैं कि राकेश आपका ठीक चल रहा हो तो आपके जीवन में कभी किसी बात की कोई कमी नहीं रहेगी और दौलत-शोहरत आपको घेरे रहेगी। कई बार ना चाहते हुए भी हम इन ग्रहों को साध नहीं पाते और परेशानी में फंसने लगते हैं। कुछ सरल उपायों से ऐसे साधें इन दबंग ग्रहों को- ....

  • जब जीवन को निराशा घेर ले, करें ये उपाय, नहीं रहेगी कोई कमी
    कभी-कभी जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं होता। सब काम अटकने लगते हैं, किसी भी काम में जातक को सफलता नहीं मिल पाती। ऐसे में व्यक्ति निराशा के भंवर में फंसने लगता है और इधर-उधर के जाल में फंसने लगता है। ज्योतिष में ऐसे समय को संक्रमण काल का नाम दिया है। कहते हैं कि इस कालखंड में राशिवार पूजा की जाए तो सबकुछ अच्छां होने लगता है। आपके बुरे दिन भी अच्छोंं में बदलने लगते हैं-....

  • केवल यह फूल भगवान शंकर को चढाने से मिलता है मनचाहा लाइफ पार्टनर
    ज्योतिष के अनुसार कुंडली का सातवां भाव आपके जीवनसाथी का अच्छा या बुरा होना तय करता है लेकिन शिवपुराण के अनुसार यदि एक खास किस्म का फूल भोलेनाथ पर चढाया जाए तो केवल तीन महीनों में भी मनचाहा वर या वधू मिलना जाता या जाती है। यकीन मानिए यह परखा हुआ उपाय है- ....

  • आप भी जान सकते हैं कि कल क्या होने वाला है
    हर व्यक्ति की चाहत है कि उसे भविष्य का आभास पहले ही हो जाए। यानी आने वाले कल को पहले ही जान ले लेकिन यह जानना कोई बच्चों का खेल नहीं। पहले के जमाने में ऋषि-मुनियों के पास ही यह सिद्धी हुआ करती थी। आज के दौर में आम आदमी भी कुछ खास अभ्याहस के साथ अपनी छठी इंद्री को जगाकर आने वाले कल का पूर्वाभास कर सकता है। हालांकि इसमें थोडा समय लग सकता है लेकिन कुछ समय के अभ्यास के बाद आप आने वाले कल को संकेंतों के अनुसार जान सकते हैं। ....

  • इन शुभ और सर्वश्रेष्ठन मुहूर्तों में किया श्रीगणेश का ध्यान, तो हो जाएंगे निहाल
    मानव जीवन का परम लक्ष्य सद्गुणों में वृद्धि के साथ देवत्व की प्राप्ति है और काम क्रोध लोभ मोह आदि आसुरी भाव उसमें प्रधान प्रबल विघ्न है। भगवान श्री गणेश ऋद्धि, सिद्धि बुद्धि प्रदाता एवं विघ्नहर्ता है। अतः साधना, उपासना या धार्मिक या समस्त मांगलिक कार्यों के आरम्भ में श्री गणेश का पूजन, स्तवन, स्मरण, नमन आदि का विधान है। विद्याराम्भ या व्यावसायिक बही-खातों के प्रथम पृष्ठ पर श्री गणेशाय नमः मांगलिक वाक्य अवश्य लिखा जाता है। इसीलिए रामचरित मानस में संत तुलसीदास जी सर्वांग्र-पूज्य, आदिपूज्य, पार्वती षिव तनय श्री गणेश की गरिमा में कहते है:-महिमा जासु जान गनराऊ प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ।। कहते हैं आज के दिन यदि शुभ मुहूर्त में पूजा आराधना की जाए तो फल जल्‍दी और शुभ मिलते हैं। ....

  • मनचाहा वरदान पाने के लिए गणेश चतुर्थी पर करें, इन चमत्कारी मंत्रों का जाप
    सर्व विघ्नों के हर्ता और ऋद्धि-सिद्धि बुद्धि के प्रदाता गणपति का चाहे कोई सत्कर्मानुष्ठान हो या किसी देवता की आराधना का प्रारम्भ या किसी भी उत्कृष्ट या साधारण लौकिक कार्य सभी में सर्वप्रथम इन्हींक का स्मरण, विधिवत् अर्चन एवं वन्दन किया जाता हैं। स्कन्दपुराण के अनुसार मां पार्वती ने अपने शरीर की उबटन की बत्तियों से एक शिशु बनाकर उसमें प्राणों का संचार कर गण के रुप में उन्हें द्वार पर बैठा दिया। भगवान शिव को द्वार के अन्दर प्रवेश नहीं करने देने पर गण और शिव में युद्ध हुआ। शिवजी ने गण का सिर काट कर द्वार के अन्दर प्रवेश किया। पार्वती ने गण को पुनः जीवित करने के लिए शिवजी से कहा। शिवजी ने एक हाथी के शिशु के सिर को गणेश जी के मस्तक पर जोड़कर पुनः जीवित कर पुत्र रुप में स्वीकार किया। इससे ये गजानंद कहलाए। तंत्र शास्त्र में निम्न गणेश मंत्रों का जप अभिष्ट फल प्राप्ति में सहायक होता है-....

  • इन देवी-देवताओं को लगाएं ये भोग, हो जाएंगे तुरंत प्रसन्न
    सभी तरह के देवी-देवताओं को भोग लगाने का शास्त्रों में नियम बताया गया है। गणेश चतुर्थी आ रही है लोग मोदक का भोग भगवान गजानन को लगाएंगे। उनकी ही तरह अन्य देवी-देवताओं को क्या क्या भोग लगाकर किया जा सकता है प्रसन्न, आइए जानें जरा-....

  • अगर गलती से हो जाए गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन करें ये उपाय, बच जाएंगे कलंक से
    सृष्टि के प्रथम पूज्य देव गजानन का सबसे बडा त्योहार गणेश चतुर्थी पूरी दुनिया 25 अगस्त को मनाएगी। यूं तो यह तिथि सबसे श्रेष्ठ और पवित्र है लेकिन कहते हैं यदि इस रात्रि गलती से भी यदि चंद्र दर्शन्‍ हो जाए तो आप पर भारी पड सकती है। शास्त्रों के अनुसार यदि भूल से भी चौथ का चंद्रमा दिख जाय तो श्रीमद् भागवत् के 10वें स्कन्ध के 57वें अध्याय में दी गई स्यमंतक मणि की चोरी की कथा का आदरपूर्वक श्रवण करना चाहिए। कहते हैं मानव ही नहीं पूर्णावतार भगवान श्रीकृष्ण भी इस तिथि को चंद्र दर्शन करने के पश्चात मिथ्या कलंक से नहीं बच पाए थे। ....

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