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  • पांच ऐसे वास्तु दोष जातक को आत्महत्या करने तक के लिए कर देते हैं मजबूर
    वास्तु के अनुसार कुछ ऐसे घातक दोष भी हाते हैं जो जातक के अपनी जिंदगी से हाथ धोने के लिए भी विवश कर देते हैं। आइए जानते हैं ऐसे घातक दोषों और निवारण के बारे में—....

  • श्राद्ध पक्ष में काले तिल, शहद और कुश का है चमत्कारिक महत्‍व
    काले तिल, शहद और कुश को तर्पण व श्राद्धकर्म में सबसे जरूरी हैं। माना जाता है कि तिल और कुश दोनों ही भगवान विष्णु के शरीर से निकले हैं और पितरों को भी भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार तीनों देवता ब्रह्मा, विष्णु, महेश कुश में क्रमश: जड़, मध्य और अग्रभाग में रहते हैं। इनका उपायोग कर हम पितरों को भी प्रसन्न कर सकते हैं।....

  • ब्रह्म स्थान को दें पूरा स्थान, हो जाएंगे वारे-न्यारे, नहीं रहेगी दौलत की कमी
    वास्तु् शास्त्र में ब्रह्म स्थान और ब्रह्म स्थल का खासा महत्व है। कहते हैं कि घर में ब्रह्म स्थान को महत्व‍ देते हुए काम किए जाएं तो भवन मालिक के वारे-न्यारे हो सकते हैं। कभी भी ब्रह्म स्थान को ढककर रखना मुसीबतों को न्योता देना माना जाता है-....

  • दुश्मन को बर्बाद कर सकते हैं ये चमत्कारी टोटके
    जीवन में न चाहते हुए भी शत्रु इकट्ठे हो जाते हैं। अगर आप समय रहते दुश्मन से बचाने की उपाय नही करते तो आपको भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, अगर आप दुश्मन को तबाह करने के टोटके करते हैं तो आपको काफी हद तक उनसे छुटकारा मिल सकता है।....

  • ऐसे अचूक टोटके जो कभी नहीं हुए फेल, एक बार आजमाकर देखो
    पुराने जमाने में लोग किसी भी काम को पूरा करने से पहले टोटकों का प्रयोग करते थे। उनका मानना था कि उन टोटकों से उनके काम बनेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान हो जायेगा। इसके लिए लोग घर से निकलते ही कुछ चीजों को अपने साथ लेकर निकलते थे। उनकी मान्यताओं के अनुसार ऐसे उपाय या टोटके उनके काम को किसी भी हाल में असफल नहीं होने देते थे।....

  • पितृदोष होने पर भूत-प्रेतों का भय करें ऐसे दूर
    कई बार लोगो की असामयिक मृत्यु होने पर या दुर्योग संयोग होने पर पितृदोष होने पर भी भूत-प्रेतों का भय हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार जिसके यहां खून के रिश्ते में कोई पानी में डूब गया हो या अग्नि द्वारा जल गया हो या शस्त्र द्वारा मौत हो गई हो या कोई औरत तड़प-तड़प कर मर गई हो या मारी गई हो, उनको प्रेत-दोष भुगतना पड़ता है और कई बार तो बाहरी भूत प्रेतों का भी असर हो जाता है। जैसे किसी समाधि या कब्र का अनादर अपमान किया जाए या किसी पीपल-बरगद जैसे विशेष वृक्ष के नीचे पेशाब आदि करने से यह दोष शुरू हो जाता है। कई बार किसी शत्रु द्वारा किए कराए का असर भी होता है। ऐसे में ज्योयतिषी और विद्वानों की मदद लेना ही कारगर उपाया बताया गया है।....

  • अनुभव पर आधारित 30 ऐसे आसान सूत्र जो बदल देंगे आपकी जिदंगी
    जीवन को खुशनुमा बनाने और सुख-समृद्धि से भरने के लिए शास्त्रोंक में यूं तो ढेरों बातें बताई गई हैं लेकिन कुछ बाते विद्वानों और पंडितों के अनुभवों की भी हैं जो कि इतनी सटीक बैठती हैं कि व्य क्ति निहाल हो जाता है। आपको ऐसी भी अनभुवों पर आधार 30 ऐसी बातें बताई जा रही हैं, जिन्हें अपनाने से न केवल आपको जीवन में तुरंत लाभ मिलने लगेगा बल्कि प्रतिकूल ग्रह भी अनुकूल होने लगेंगे। ये बेहद सरल और आम उपयोग में ली जाने वाली बातें हैं- ....

  • जीवन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा, कहीं आपका चंद्रमा नीच का तो नहीं चल रहा है?
    जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति और उस पर दूसरे ग्रहों के प्रभावों के आधार पर इस बात की गणना करना बहुत आसान हो जाता है कि मनुष्य की मानसिक स्थिति कैसी रहेगी। ज्योतिष के अनुसार कुंडली में चंद्र का उच्च या नीच होना व्यक्ति के स्वभाव और स्वरूप में साफ दिखाई देता है। अगर आपके साथ कुछ ऐसा घटित हो रहा है तो समझिए आपका चंद्र नीच का चल रहा है-....

  • इस तीर्थस्थल पर अगर किए श्राद्ध कर्म तो पितरों को मिलेगी शांति, देंगे आशीर्वाद
    कहा जाता है कि गया में यज्ञ, श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान करने से मनुष्य को स्वर्गलोक एवं ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है, गया के धर्म पृष्ठ, ब्रह्म सप्त, गया शीर्ष और अक्षय वट के समीप जो कुछ भी पितरों को अर्पण किया जाता है , वह अक्षय होता है. गया के प्रेत शिला में पिंड दान करने से पितरों का उद्धार होता है। पिंड दान करने के लिए काले तिल, जौ का आटा , खीर, चावल, दूध, सत्तू आदि का प्रयोग किये जाने का विधान है।....

  • धन-धान्य में करनी है तेजी से बढोतरी तो करें इस देव की पूजा
    दरिद्रता को दूर करने के लिए प्रत्येक शुक्रवार को धन की देवी महा लक्ष्मी के साथ गणेश जी का पूजन करना चाहिए। गणेश जी के पूजन से कष्ट, बाधा, रोग और लिए हुए ऋण से शीघ्र मुक्ति मिलती है, धन-धान्य की वृद्धि होती है तथा जीवन में आनंद, विजय आरोग्य और संतान सुख प्राप्त होता है।....

  • आप महादेव के भक्त हैं तो इन बातों को जरूर जान लें
    बाबा भोलेनाथ सब पर कृपा बरसाते हैं। उनके द्वार पर आया कोई भी जातक कभी खाली हाथ नहीं लौटता यही वजह है कि दुनिया में सबसे ज्यारदा भक्तगण महादेव के ही हैं। यदि आप भी हैं शिव के भक्त तो आपको इन खास बातों का ध्यान जरूर होना चाहिए।....

  • पितृ दोष है भी या नहीं, इस तरीके से जानें तुरंत
    हिन्दू धर्म में ज्योतिष को वेदों का छठा अंग माना गया है और किसी व्यक्ति की जन्म-कुण्डली देखकर आसानी से इस बात का पता लगाया जा सकता है कि वह व्याक्ति पितृ दोष से पीडित है या नहीं क्यों कि यदि व्याक्ति के पितर असंतुष्टय होते हैं, तो वे अपने वंशजों की जन्म -कुण्डंली में पितृ दोष से सम्बंधित ग्रह-स्थितियों का सृजन करते हैं।....

  • जब हो कुंडली में पितृदोष, तो श्राद्ध पक्ष में यह काम करें, मिलेगी राहत
    पितृदोष के कारण बार-बार दुर्घटनाएं, मन में हमेशा अनहोनी की आशंका, अपयश, नौकरी की परेशानी, विवाह में रुकावट, मानसिक संताप, संतान कष्ट, धनाभाव, व्यापार में नुकसान, रोजगार की समस्या, भय, शारीरिक व्याधि, दाम्पत्य जीवन में क्लेश इत्यादि कष्ट होते हैं। श्राद्ध पक्ष में पितृ दोष निवारण के लिए किए गए उपायों को करने से पितरों के आशीर्वाद के फलस्वरुप संतान सुख, सम्पत्ति लाभ, राज्य सुख, मान-सम्मान आदि की प्राप्ति होती है। रोग तथा असामायिक दुर्घटनाओं से बचाव होता है।....

  • श्राद्धकाल में भूलकर भी नहीं करें ये 8 काम, इन कामों को करना ना भूलें
    आज से पूरे देश भर में पितृ पक्ष मनाया जाएगा। इस दौरान कुछ कामों को अवश्य करने और कुछ को नहीं करने से ही मनमाफिक लाभ मिलने लगता है। ऐसे में इन खास बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। ....

  • आज है पहला श्राद्ध, पितरों को इस तरह मनाएंगे तो आएगी सुख-समृद्धि और खुशहाली
    पितृपक्ष या महालय में दिवंगत पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध एवं तर्पण करने से, पितर तृप्त होकर वंश वृद्धि और सुख शांति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। पितृपक्ष में सूर्य कन्या राषि के दसवें अंश पर आता है और वहां से तुला राशि की ओर बढ़ता है। इसे कन्यागत सूर्य कहते हैं। जब सूर्य कन्यागत हो तो उस समय पितरों का श्राद्ध करना अति महत्वपूर्ण कहा गया है। प्रतिवर्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आष्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष मान्य रहता है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष में दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंड़दान यज्ञ तथा भोजन का बिशेष प्रावधान किया गया है। वर्ष में जिस भी तिथि को वे दिवंगत होते हैं, पितृपक्ष की उसी तिथि को उनके निमित्त विधि-विधान पूर्वक श्राद्ध कार्य सम्पन्न किया जाता है। दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्रद्धा पूर्वक किए दान को ही श्राद्ध कहा जाता है। ....

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