Astrology Articles

  • इन अमूल्य टोटकों से पर्स में रूकने लगेगा पैसा, नहीं रहेगी नोटों की कमी
    हर कोई पैसे को रोकना और उसमें बढेातरी चाहता है, ऐसे में पर्स पर ऐसे प्रयोग किए जा सकते हैं जिनसे पैसों में बरकत होने लगती है। इस संबंध में वास्तु द्वारा कई महत्वपूर्ण टिप्स दी गई हैं। जिन्हें अपनाने पर व्यक्ति को भी धन की कमी का एहसास ही नहीं होता है।....

  • 11 लघु नारियल के इन उपायों से लक्ष्मी चिरकाल तक रहेगी
    ज्योतिष और तंत्र शास्त्र में लघु नारियल का खासा महत्व बताया गया है। कहते हैं कि इनके कुछ खास उपाय कर लिए जाएं तो ना कभी पैसों की कमी रही और ना ही किसी तरह का कोई संकट जीवन भर आता। इसके कुछ खास उपायों को करने से लक्ष्मी चिरकाल तक घर में निवास करती है।....

  • सात चक्रों की माला करें इस दिन करें धारण, हो जाएगी बल्लेे-बल्ले
    सात रत्न अलग-अलग पहनना तो संभव नहीं है लेकिन यदि सात चक्रों की माला को धारण किया जाए तो कुछ ही दिनों में किस्मत बदल सकती है। यह माला बनाकर एक साथ पिरोकर बनाई जाए तो बुरे दिन भी अच्छों में बदल जाती है। कहते हैं बुधवार को दोपहर 11 बजकर 11 मिनट पर माला को धारण किया जाए तो बल्लें-बल्ले होने लगते हैं। ....

  • हींग के एक टोटके से होने लगेंगे चमत्कार, बदल जाएगी किस्मत
    आपने ज्योहतिष और वैदिक शास्त्रों के अनुसार ग्रहों में प्रतिकूलता के लिए कई प्रयोग देखे होंगे लेकिन हम आपको बता रहे हैं आपकी रसोई में हर वक्तं उपस्थित हींग के ऐसे टोटके जो आपकी किस्म त को भी बदल सकते हैं। इन्हें विश्वास के साथ आजमाए जाएं तो ये किसी भी जातक की तकदीर और तस्वीर बदल सकते हैं-....

  • झलझूलनी एकादशी के दिन करें ये टोटके, प्रेम बढता चला जाएगा
    प्रेमी-प्रेमिका हो या पति-पत्नी यदि दोनों में प्रेम भरपूर रहता है तो रिश्ते प्रगाढ होते चले जाते हैं। लेकिन कई बार ऐसे दुर्योग बनते हैं कि चाहकर भी क्लेश परिवार को घेरे रहते हैं। आज झलझूलनी एकादशी है। यदि आज के दिन प्रेमी-प्रेमिका हो या पति-पत्नी कुछ खास उपाय करे तो प्रेम चिरकाल तक चलता है और संबंध मजबूत बने रहते हैं। ....

  • मन की सभी इच्छाएं होंगी पूरी, इस देव को ध्याने भर से
    धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार सृष्टि में एक देवता ऐसे भी हैं, जिन्हेंे केवल कुछ दिनों तक ध्यामने से सभी तरह के मनोरथ पूरे होते हैं और जातक अपना जीवन सुख से व्येतीत कर सकता है। प्रत्ये क जातक को श्रीकृष्ण की नियमित पूजा-अर्चना करनी चाहिए। जिन लोगों का जन्म अमावस्या के आसपास हुआ हो या जिनकी जन्मपत्री में चंद्रमा क्षीण हो या अन्य किसी ग्रह से पीडि़त हो, उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए क्योंकि पाराशर मुनि ने श्रीकृष्ण को चंद्र का अवतार ही माना है-चंद्रस्य यदुनायक:। चंद्रमा के कमजोर होने से होने वाले सारे अरिष्ट श्रीकृष्ण के पूजन-अर्चन से खुद ब खुद ही दूर हो जाते हैं। श्रीकृष्ण की नियमानुसार और नियमित स्तुति की जाए तो कैसा भी संकट पास भी नहीं आता और जातक सभी सुखों से युक्त जीवन का आनंद लेता है। कैसा भी कष्ट हो परेशानी हो श्रीकृष्ण को जपने से सभी में राहत मिलती है। ....

  • छोटा सा दिखने वाला यह पेड, पैसों को अपनी ओर खींचने की ताकत रखता है
    भारतीय धर्म एवं संस्कृति में बहुत से पेड़-पौधों को पूजनीय मानते हुए उन्हें लगाकर उनका संरक्षण करना अनिवार्य बताया गया है। इनमें तुलसी, पीपल, आंवला, बरगद, अशोक, आम, बेल, आदि प्रमुख हैं। यद्यपि इन पौधों का सीधा संबंध हमारे पर्यावरण के संरक्षण से है फिर भी अनेक धार्मिक और मांगलिक कार्यों में इनका उपयोग किया जाता है। तुलसी एकमात्र ऐसा पौधा है जो आसानी से कहीं भी लगाया जा सकता है। इसके लिए ज्यादा जगह की भी आवश्यकता नहीं होती है। भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय हैं। प्रसाद के साथ तुलसी दल का प्रयोग अधिक शुभ फलदायी माना गया है। कहते हैं कि जिस घर में तुलसी का पौधा बिना किसी विशेष श्रम के वृद्धि करता है, वहाँ सुख, समृद्धि, शांति और संपन्नता बनी रहती है तथा अगर भवन में किसी प्रकार का वास्तु दोष है तो वह भी दूर हो जाता है।....

  • मारकेश के बारे में कितना जानते हैं आप ? कैसे बचें जब मृत्‍यु हो निश्चित
    स्व्यं की मृत्यु के बारे में जानना मारकेश कहलाता है। हालांकि किसी व्यक्ति को इस बारे में जानने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए परन्तु फिर भी कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो उत्सुकतावश जानने के लिए अक्सर पूछते हैं की मेरी मृत्यु कब होगी, मेरी मृत्यु कैसे होगी, मेरी मृत्यु कहां होगी? इससे बचने के उपायों पर भी नजर डाल लेनी चाहिए-....

  • 6 सितम्बर से हो रहा है श्राद्धपक्ष का आगाज, पितरों को इस तरह मनाएं
    आगामी 6 सिंतबर को पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। विष्णु पुराण में कहा गया है कि श्राद्ध तथा तर्पण से तृप्त होकर पितृगण समस्त कामनाओं को पूर्ण कर देते हैं। श्राद्ध में पितरों की तृप्ति ब्राह्मणों के द्वारा ही होती है अत: श्राद्ध के अवसर पर दिवंगत पूर्वजों की मृत्यु तिथि को निमंत्रण देकर ब्राह्मण को भोजन, वस्त्र एवं दक्षिणा सहित दान देकर श्राद्ध कर्म करना चाहिए। पितरों को मनाने और पितृदोष को दूर करने के आसान उपाय आपको बताए जा रहे हैं-....

  • वास्तु में ये गलतियां ना हो तो होंगे वारे-न्यारे, सुख-समृद्धि घर में पसरेगी
    वास्तु, प्रकृति से मनुष्य के सामंजस्य को बनाये रखने की वह अद्भुत कला है जो दस दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, उत्तर-पूर्व यानी ईशान, दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय, दक्षिण- पश्चिम यानी नैऋत्य , उत्तर -पश्चिम यानी वायव्य, आकाश और पाताल) तथा पांच तत्वों (आकाश, वायु, जल, अग्नि एवं पृथ्वी) पर आधारित होती है। किसी भी दिशा या तत्व के असंतुलित अथवा दोषपूर्ण हो जाने से वास्तु नकारात्मक प्रभाव देने लगती है। जिसके कारण उसमें रहने वालों को बहुत सी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में कुछ खास बातों को ध्याान में रखने से घर में बरकत आती है और पैसों की कभी कमी नहीं आती।....

  • इन तांत्रिक प्रयोगों से मां लक्ष्मी रहेंगी सदा प्रसन्न, कभी नहीं रूठेंगी
    भारतीय धर्म और संस्कृति में महादेवी लक्ष्मी की आराधना को विशेष महत्व दिया गया है। कमला, रमा, पद्मा, पदमवासा, विष्णुप्रिया आदि नामो से लोकप्रिय लक्ष्मी जी को सुख, संपदा और धन प्रदान करने वाली माना गया है। कमल पुष्प पर आसीन देवी लक्ष्मी के दो हाथो में कमल सुशोभित हैं, वही बाये हाथ से वो धन वर्षा करती हे तो दाहिने हाथ से अपने भक्तो को शुभ आशीर्वाद प्रदान करती हैं। आगम ग्रंथ में लक्ष्मी जी को दो भुजा वाली दर्शाते हुए स्वर्णिम आभा वाले कमल पुष्प पर विराजमान होना बताया गया है। देवी लक्ष्मी के दोनो नेत्र कमल के समान हैं तथा दोनो कानो में मकर की आकृति के रत्न जडित कुंडल सुशोभित हैं। मां लक्ष्मी को रिझाने और उन्हें वश में करने के कुछ शास्त्रों में नियम बताए गए हैं-....

  • आज राधारानी का है जन्‍मदिन, इनको करें प्रसन्न, श्री कृष्णा भर देंगे झोली
    भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि ;यानी कि आज श्री कृष्ण की प्राणप्रिया राधाजी का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार राधाजी भी श्री कृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं। वे बृज में वृषभानु वैश्य की कन्या हुईं । उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ बल्कि माता कीर्ति ने अपने गर्भ में  वायु को धारण कर रखा था और योगमाया की प्रेरणा से कीर्ति ने वायु को जन्म दिया। लेकिन वायु के जन्म के साथ ही वहां राधा, कन्या के रूप में प्रकट हो गईं इसलिए श्री राधा रानी को देवी अयोनिजा कहा जाता है। बारह वर्ष बीतने पर उनके माता-पिता ने रायाण वैश्य के साथ उनका सम्बन्ध निश्चित कर दिया। उस समय श्री राधा घर में अपनी छाया को स्थापित करके स्वयं अंतर्धयान हो गईं। उस छाया के साथ ही उक्त रायाण का विवाह हुआ। शास्त्रों की मानें तो ब्रह्माजी ने पुण्यमय वृन्दावन में श्री कृष्ण के साथ साक्षात राधा का विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया था। कहते हैं इन्‍हें प्रसन्‍न करने से भगवान श्रीकृष्‍ण प्रसन्‍न होकर सभी मनचाही इच्‍छाएं पूरी करते हैं।....

  • ऐसा भोजन करने से होंगे सभी ग्रह अनुकूल, मिलने लगेगी दौलत और शोहरत
    श्रीमद्भगवद् गीता के सत्रहवें अध्याय में भोजन के तीन प्रकारों, सात्विक, राजसिक एवं तामसिक का उल्लेख मिलता है। सात्विक आहार शरीर के लिए लाभकारी होते हैं और आयु, गुण, बल, आरोग्य तथा सुख की वृद्धि करते हैं। इस प्रकार के आहार में गौ घृत, गौ दुग्ध, मक्खन, बादाम, काजू, किशमिश आदि मुख्य हैं। राजसिक भोजन कड़वे, खट्टे, नमकीन, गरम, तीखे व रूखे होते हैं। इनके सेवन से शरीर में दुःख, शोक, रोग आदि उत्पन्न होने लगते हैं। इमली, अमचूर, नीबू, छाछ, लाल मिर्च, राई जैसे आहार राजसिक प्रकृति के माने गए हैं। कहते हैं कि सात्विक भोजन करने से सभी ग्रह अनुकूल होने लगते हैं और दौलत और शोहरत पाने के योग बनने लगते हैं।....

  • इस धातु की माला से जप करो, नहीं रहेगी पैसों की कमी
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्फटिक को धन की देवी लक्ष्मी जी का स्वरुप माना गया है, जिसे कंठ हार अर्थात माला के रूप में धारण किया जाता है। स्फटिक निर्मल, रंगहीन, पारदर्शी और शीत प्रभाव रखने वाला उप-रत्न है। आयुर्वेद में स्फटिक का प्रयोग सभी प्रकार के ज्वर, पित्त प्रकोप, शारीरिक दुर्बलता एवं रक्त विकारों को दूर करने के लिए शहद अथवा गौ मूत्र के साथ औषधि के रूप में किया जाता है।....

  • इस देव की उपासना से होंगे रोजगार के दोष दूर, नहीं आएगी कोई प्रेतबाधा
    यूं तो सभी 36 करोड देवी-देवता को स्मरण करना संभव नहीं है लेकिन उनमें से कुछ खास देवों का स्म रण और आराधना करने से न केवल रोजगार संबंधी सभी परेशानियां दूर होती हैं, बल्कि आरे-तारे-उतारों से जुडी सभी समस्यानएं दूर होती जाती हैं। कहते हैं कि श्री हनुमानजी की विधि-विधान और श्रद्धा भाव से उपासना सर्व कल्याणकारी है। मनोवांछित फल प्राप्त करने और दुःख, कष्ट, बाधा एवं भूत-प्रेत के प्रकोप से बचने के लिए श्री हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए। ....

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