तिथियों से जानें सुयोग-कुयोग
ज्योतिष शास्त्र में किसी भी काम शुरुआत से शुभ और अशुभ तिथियां देखना आवश्यक है। चंद्रमा की एक कला को तिथि माना गया है। इसका मान सूर्य व चंद्रमा के बीच के अन्तर अंशों से निकाला जाता है। प्रति दिन 12 अंशों का भ्रमण सूर्य व चंद्रमा के भ्रमण में होता है, जिसकी गणना हम पक्षों को लेकर करते है। अमावस्या के बाद प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियां शुक्ल पक्ष की और पूर्णिमा के बाद प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक की तिथियां कृष्ण पक्ष की होती है। हमें तिथियों की गणना शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से करनी चाहिए। ....
घरेलू और आम ज्योतिषीय उपचारों से हो सकते हैं सभी देव प्रसन्न
ग्रहों की शांति और उनकी अनुकूलता पाने के लिए ज्यादातर जातक साधना और दान पर ही जोर देते हैं। लेकिन कई ज्यो तिषीय उपचार ऐसे भी हैं, जिन्हें दैनिक जीवन के क्रियाकलापों में भी किया जा सकता है। इन उपचारों पर अमल करने से स्थितियां जातक के अनुकूल और प्रभाव में रहने की संभावना बढ़ जाती है।
एक कुशल गृहिणी चूल्हा जलाने के बाद पहली रोटी कुत्तों के लिए और एक रोटी गाय के लिए बचाकर रखती है। घर की सफाई के दौरान जब पोंछा लगाती है तो बाल्टी के पानी में नमक मिलाती है। शाम के समय मंदिर जाते हुए चीटिंयों के लिए थोड़ा आटा और चीनी लेकर निकलती है। देखने में ये दैनिक जीवन का हिस्सा दिखाई दे सकते हैं, लेकिन अधिकांश महत्वपूर्ण ज्योतिषीय उपचार इन्हीं से जुड़े हुए हैं। महंगे रत्नों या पुरोहितों के सानिध्य में यज्ञ हवन करवाने की तुलना में रोजाना का यह मौन यज्ञ आपको कई तरह की बाधाओं से बचाकर रखता है। दिनचर्या से जुड़े ये नियम सामान्य नियम न होकर ज्योतिषीय उपचारों के नियम हैं। हर उपचार अपनी श्रेणी का श्रेष्ठ उपचार है।
....
हिंदी महीनों के अनुसार जन्मदिन बताता है आपका स्वभाव और भविष्य
हिंदी महीनों के अनुसार जन्मदिन बताता है आपका स्वभाव और भविष्य अपना भविष्य जानने के लिए जातक अनेक तरीकों को अपना सकता है। कोई ज्योतिष की मदद लेता है तो अंक शास्त्र की मदद लेता है, कोई टैरो कार्ड को भी अपना सकता है। लेकिन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यदि हिंदू कैलेंडर के अनुसार जन्म का माह देखेंगे तो किसी भी जातक का स्वभाव और भविष्य आसानी से देखा जा सकता है। एक बार कोशिश जरूर करके देखें:....
जन्माष्टमी पर एक नारियल और 11 बादाम चढाने से धन प्राप्ति के बनेंगे प्रबल योग
आगामी 15 अगस्त को देश की आजादी के उत्सव के साथ कान्हा के जन्मोत्सव को भी धूमधाम से मनाया जाएगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन यदि कुछ खास उपाय किए जाएं तो न केवल धन प्राप्ति के प्रबल योग बनने लगेंगे बल्कि सभी मनोकामनाएं भी पूरी होंगी।....
मन की हर मनोकामना को पूरी करता यह देव, कुछ मंत्रों के जाप से दे देता है सबकुछ
प्राचीन काल में भगवान को रिझाने के लिए ऋषि-मुनियों को सालों तप करना पडता था तब कहीं जाकर उन्हेंक भगवान का आशीष मिलता था। लेकिन कलयुग में कहा जाता है कि थोडा सा प्रयास करने से ही सबकुछ मिल सकता है। कहते हैं अगर तीन महीनों तक सूर्य भगवान की उपासना की जाए तो मन की सभी इच्छाएं चंद दिनों में ही पूरी हो जाती है और जातक के घर में सुख-सम़ृद्धता बसने लगती है। रविवार और सोमवार को सूर्योपासना से घर में समृद्धि व गर्भवती महिलाओं को गुणी पुत्र की प्राप्ति होती है। बह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इन दिनों में खेजड़ी के पेड़ के नीचे प्रात: काल सूर्योपासना करते हुए इस मंत्र का 51 बार जाप करने से लाभ मिलता है-....
लड्डू गोपाल को भी घर में रखने के होते हैं नियम, कृपा पाने के लिए करें ये खास जतन
भगवान श्रीकृष्ण का ही एक रूप लड्डू गोपाल को भगवान का साक्षात रूप कहा जाता है। लड्डू गोपाल जी को लेकिन घर में रखने के नियम थोडे कडे जरूर हैं। अगर उन नियमों का पालन कर लिया जाए तो भगवान मुरारी की आप पर पूरी तरह कृपा बरसने लगती है। ....
इन राशियों के लिए चांदी है पारस पत्थर, केवल रखने भर से घर जाएगा पैसों से
शिव पुराण के अनुसार चांदी भगवान शंकर के नेत्रों से उत्पन्न हुई थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि चांदी के कुछ खास टोटकों से किसी भी तरह के संकट से मुक्ति मिलती है और धनवान बनने के योग बनने लगते हैं। कुछ खास राशियों के लिए तो चांदी पारस पत्थर जैसी है, जोकि चांदी को रखने भर से धनावान होने लगते हैं। ....
काली हल्दी के ये चमत्कारी टोटके बदल देंगे आपकी जिंदगी
दुनिया में कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिनको अपनाने से आपकी जिंदगी की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है। ऐसी ही एक है काली हल्दी। तंत्र शास्त्र में इसे अचूक हथियार माना गया है। कहते हैं कि काली हल्दी के टोटकों का असर कभी खाली नहीं जाता। काली हल्दी बड़े काम की है। वैसे तो काली हल्दी का मिल पाना थोड़ा मुश्किल है, किन्तु फिर भी यह पंसारी की दुकानों में मिल जाती है। यह हल्दी काफी उपयोगी और लाभकारक है। कुछ खास उपयोग हैं इसके- ....
पैसे को अपनी ओर खींचने के चमत्कारी उपाय
पैसा हर आदमी की जरूरत है। पैसों के बिना किसी भी स्तर पर जीना संभव नहीं है। लेकिन कई बार ना चाहते हुए भी पैसा बच नहीं पाता या पैसा आना ही मुश्किल हो जाता है। आज हम आपको ऐसे उपाय बताएंगे जिससे बहुत जल्दी ही आर्थिक तंगी दूर होगी और घनागमन के नए स्रोत खुलेंगे। इसके अलावा इससे सदस्यों के बीच कलह और मनमुटाव की स्थिति भी खत्म होती है और घर में खुशहाली आती है। ....
चंद्रग्रहण करें ये उपाय, पापग्रहों से रहेंगे दूर आएगी समृद्धि
कल यानी रक्षाबंधन को चंद्रग्रहण का साया रहेगा। ऐसे में केवल चंद्रदेव की आराधना कर ही अच्छे परिणाम पाए जा सकते हैं। चंद्रमा मनुष्य की मनोदशा को प्रभावित करता है। चंद्रमा से परेशान व्यणक्ति अपनी दशा अथवा पापग्रह की दशा में मानसिक कमजोरी, अवसाद, मानसिक उद्विग्नता इत्यादि मनोरोग देता है। कुण्डली में केमद्रुम योग निर्मित होता हो, तो व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर एवं निर्बल इच्छाशक्ति वाला होता है। वह जीवन में सोचता तो बहुत है, लेकिन किसी भी कार्य को समय पर पूर्ण नहीं कर पाता है। वह शीघ्र ही अवसाद में आ जाता है। एेसे में चंद्रदेव के स्वामी महादेव की मन से आराधना उसे भरपूर लाभ दे सकती है।....
चाहिए अकूत दौलत और शोहरत जपें, जन्माष्टमी पर जपें केवल ये आठ चमत्कारी कृष्ण मंत्र
आगामी 15 अगस्त को श्रीकृष्ण आ रहे हैं। इस दिन पूरे देश में श्रीकृष्ण का जन्म् धूमधाम से मनाया जाएगा। कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण की अपने भक्तों पर विशेष अनुंकपा होती है। वे सखा के रूप में सुदामा का उद्धार करते हैं तो अर्जुन के सारथी बन उन्हें कर्तव्य पालन की प्रेरणा भी देते हैं। वे प्रेम में राधा हो जाते हैं तो मीरा के गिरधर गोपाल बन जहर के प्यालों को अमृत कर देते हैं। उनके बचपन की शुरुआत से लेकर व्याध द्वारा शिकार होने तक उनका जीवन चमत्कारों की गाथा कहता है। वे द्रोपदी के रक्षक भी हैं तो गोवर्धन उठाकर इंद्र के अहंकार को भी तोड़ते हैं ऐसे दयालु कृपालु श्री कृष्ण की भक्ति में भला कौन नहीं डूबना चाहेगा। वैसे तो उनकी कृपा पाने के लिये श्री कृष्ण को समर्पित हो जाना ही पर्याप्त है लेकिन श्री कृष्ण की कृपा पाने के कुछ विशेष मंत्र भी हैं। इन मंत्रों की मान्यता इतनी अधिक है कि माना जाता है इनके जाप करने से रंक भी राजा हो जाता है। तो आइये जानते इन मंत्रो के बारे में-....
राखी पर रहेगा चूड़ामणि चंद्रग्रहण, इन राशियों के होंगे वारे-न्यारे
आगामी रक्षाबंधन यानी कि श्रावण शुक्ल पूर्णिमा सोमवार 7 व 8 अगस्त 2017 कि मध्य रात्रि को समस्त भारत में खंडग्रास चंद्रग्रहण दक्षिणी और पूर्वी एशिया के अधिकतर देशों यूरोप,अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया (पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, इराक, सऊदी अरब, इथोपिया, केन्या, तंजानिया, रूस, चीन, मंगोलिया, म्यांमार, मलेशिया, जापान, थाईलैंड, सिंगापुर, सोमालिया, फ़िलीपीन्स, हांगकांग) आदि में खंडग्रास चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा| इससे लगभग सभी राशियां प्रभावित होंगी लेकिन कुछ राशियों को खासा फायदा भी होगा। नुकसान राशियों को राहू और शनि के कुछ खास उपाय सुझाए गए हैं।....
ऐसे रुद्राक्ष धारण करने से बदल जाएगी आपकी तकदीर
शास्त्रों में रुद्राक्ष को भगवान शिव का आंसू बताया गया है। धरती पर इसे सबसे पवित्र धातु भी बताया गया है। रुद्राक्ष एकमुखी से लेकर चौदहमुखी तक होते हैं| पुराणों में प्रत्येक रुद्राक्ष
का अलग-अलग महत्व और उपयोगिता उल्लेख किया गया है। कुछ खास रुद्राक्ष को धारण करने से सभी ग्रह अनुकूल होने लगते हैं और आपके जीवन में सकारात्मयक परिवर्तन आने लगते हैं।
....
पेट के रोगों से हैं परेशान तो शनिदोषों को करें ऐसे दूर, होगा पक्का फायदा
ज्योतिष के अनुसार रोग विशेष की उत्पत्ति जातक के जन्म समय में किसी राशि एवं नक्षत्र विशेष पर पापग्रहों की उपस्थिति, उन पर पाप दृष्टि,पापग्रहों की राशि एवं नक्षत्र में उपस्थित होना, पापग्रह अधिष्ठित राशि के स्वामी द्वारा युति या दृष्टि रोग की संभावना को बताती है। इन रोगकारक ग्रहों की दशा एवं दशाकाल में प्रतिकूल गोचर रहने पर रोग की उत्पत्ति होती है। प्रत्येक ग्रह, नक्षत्र, राशि एवं भाव मानव शरीर के भिन्न-भिन्न अंगो का प्रतिनिधित्व करते है।....
हर हिंदू को सूतक और पातक के नियम जानने हैं बेहद जरूरी
हिंदू धर्म में जन्म और मरण और ग्रहण के समय सूतक के बारे में बहुत अधिक चर्चा होती है। ज्याूदातर लोग पुराने अनुभवों के अनुसार जैसा बुजुर्ग कहते हैं वैसा ही करने लगते हैं लेकिन बहुत कम लोग ही जान पाते हैं कि सूतक क्या होते हैं और उनका जीवन पर क्या असर पडता है। देखा जाए तो सूतक का सम्बन्ध जन्म के निम्मित से हुई अशुद्धि से है। जन्म के अवसर पर जो नाल काटा जाता है और जन्म होने की प्रक्रिया में अन्य प्रकार की जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष या पाप के प्रायश्चित स्वरुप सूतक माना जाता है। पातक का सम्बन्ध मरण के निम्मित से हुई अशुद्धि से है। मरण के अवसर पर दाह-संस्कार में इत्यादि में जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष या पाप के प्रायश्चित स्वरुप पातक माना जाता है।....