आज है नाग पंचमी, घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर कोयले या गौ माता के गोबर से नाग की मूर्ति बनाकर पूजन करें, फिर देखें जीवन में चमत्कार

भगवान शिव का स्वरुप अद्भुत है। संपूर्ण शरीर पर भस्म, जटाओं में पवित्र गंगा, भाल पर अर्ध चंद्रमा, गले में रुद्राक्ष और सर्पों की माला, हाथ में डमरू एवं त्रिशूल। जो भी उन्हें देखता है , मंत्रमुग्ध रह जाता है। नाग देवता भगवान शिव के गले का श्रृंगार होते हैं, इसलिए श्रावण मास में भगवान शिव के साथ-साथ शिव परिवार और नाग देवता की पूजन किये जाने का विधान है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नाग पंचमी के रूप में जानी जाती है। इस दिन पांच फन वाले नाग देवता की पूजा करके उन्हें चंदन, दूध, खीर, पुष्प आदि अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सर्प एवं नागों द्वारा काटे जाने का ख़तरा भी नहीं रहता है।


श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नाग पंचमी के रूप में मनाई जाती है। इस दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी सर्पराज अर्थात नाग देवता हैं। गरुण पुराण के अनुसार नाग पंचमी के दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर कोयले या गौ माता के गोबर से नाग की मूर्ति बनाकर पूजन करना चाहिए। जन्म कुंडली में कालसर्प योग होने पर अगर जीवन में अशुभ फल मिल रहे हों तो उसकी शांति के लिए नाग पंचमी का दिन शुभ माना गया है।
कुंडली में कालसर्प योग का निर्माण तभी होता है, जब राहु और केतु के बीच में सभी ग्रह मौजूद हों। कालसर्प योग वाली कुंडली के जातकों को सदैव अशुभ तथा नकारात्मक फल मिलते हों, ऐसा नहीं है। बल्कि बहुत से मामलों में इस योग के जातकों को जीवन में सफलता की ऊंचाईयों पर देखा जा सकता है। कालसर्प योग के अशुभ प्रभाव के कारण जातक को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कष्ट, पारिवारिक जीवन में कलह, बीमारी, संतान सुख की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
नाग पंचमी के दिन नाग देवता का पूर्ण श्रद्धा विश्वास और विधि-विधान के साथ पूजन करने से इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिए नाग पंचमी के दिन नाग देवता के प्रतीक के रूप में चांदी अथवा तांबे के सर्प या सात गांठ लगाई गयी एक रस्सी का पूजन नाग देवता के रूप में करना चाहिए। कालसर्प योग के अशुभ और नकारात्मक प्रभावों के बचने हेतु नाग पंचमी के दिन किसी शिव मंदिर में या बहती हुई गंगा की जल धारा में शिव मंत्रों का जप करते हुए चांदी और तांबे के सर्प का जोड़ा अर्पित करना चाहिए। इसके बाद प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की आराधना करके शिवलिंग पर गंगा जल या सादा जल चढ़ाना चाहिए। कालसर्प योग के अशुभ प्रभावों के निवारण में दूध, दही, चावल, चीनी, चांदी, तांबा, मोती, श्वेत वस्त्र, सब्जी आदि का दान भी किया जा सकता है।
नाग स्त्रोत्र सूर्य सूत्र का पाठ भी कालसर्प योग के बुरे प्रभावों से मुक्त रखता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार नाग पंचमी या सोमवार के दिनअश्वनी, रोहिणी, आद्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, हस्त, स्वाति, उत्तराषाढ़, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती नक्षत्र होने पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा विशेष फलदायी होती है। इस नाग पंचमी के दिन भी हस्त नक्षत्र पड़ रहा है, इसलिए इस अवसर पर नाग पूजा से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होने के साथ-साथ कष्ट और समस्याओं का निवारण हो सकता है।
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