नववर्ष में अपनी झोली में खुशियां भरने के लिए करें ये 6 उपाय

नूतनवर्ष में क्या जीवन का हर दिन, हर पल नया और खूबसूरत हो सकता है? बिल्कुल, अगर इंसान का मन अंदर से बदले तो यह संभव है। हालांकि मन को बदलना शायद आसान तो नहीं है लेकिन थोड़ी सी कोशिश इसे अंजाम तक पहुंचा सकती है। कुछ कोशिशें, कुछ संकल्प ऐसे लिए जा सकते हैं, जिन पर अमल से आपका अंतस नया हो सकता है और आपके लिए हर दिन नई सुबह लेकर आ सकता है।

अकारण प्रसन्न होना सीखें
आज-कल दिन हैं रिमोट कंट्रोल के। रिमोट का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भले ही आधुनिक लगता हो, आदमी के भीतर यह रिमोट बहुत पुराने समय से फिट है। गौर से देखें तो सभी लोग रिमोट कंट्रोल से जी रहे हैं। आपका रिमोट किसी और के हाथ में है और दूसरों का रिमोट आपके हाथ में। कोई भी बटन दबा देता है और आपको गुस्सा दिला सकता है, या प्रसन्न कर सकता है। आपसे किसी ने कहा,आज तो आप बहुत सुंदर लग रहे हैं, और वह व्यक्ति प्रसन्न हो गया। यह खेल निरंतर चलता रहता है। अपने सुख को दूसरे पर निर्भर मत रहने दें। आप अपने मालिक हैं। कभी खाली बैठे हैं, तो भी प्रसन्न रहे। प्रसन्न कैसे रहा जाए। इसका तरीका है कि ज्यादा सोच-विचार में न उलझें। थोड़ी गहरी सांसें लें और अपने हृदय पर ध्यान दें, धीरे-धीरे आप एक गहराई का अनुभव करेंगे। वहां आप देखेंगे कि हमेशा प्रसन्नता रहती है। अकारण होनेवाली प्रसन्नता में मस्ती होती है।

विरोध छोडऩा सीखो, मस्त रहोगे
जब भी आप किसी वाहन में बैठते हैं, तो उस वाहन के हिचकोलों से आपका शरीर दुखने लगता है। आप सोचते हैं, यह सफर की थकान है। लेकिन जरा सोचिए, आपने तो कुछ किया ही नहीं फिर थकान क्यों? थकान होती है आपके विरोध करने से। वाहन की एक गति है, उस गति के साथ आप विरोध कर रहे हैं। आप चाहते हैं कि वाहन इतने जोर से न चले, उसमें हिचकोले न हों। तो जब वाहन दाईं ओर हिलता है, आप अपने शरीर को रोकते हैं, सख्त करते हैं। आप वाहन से लड़ रहे हैं भीतर ही भीतर। ऐसे में विरोध छोड़ दें बिलकुल। सोचें कि आपका शरीर पानी से बना है, उसकी अपनी कोई इच्छा नहीं है। दूसरी बात, लयबद्ध वर्तुल बनाएं। अगर वाहन बाईं ओर झूल रहा है, आप भी झूल जाएं। उसके संग आप भी डोलें। मन में विरोध न हो, शरीर में विरोध न हो। जैसे ही मन का विरोध टूटेगा, शरीर लचीला होगा। आप न केवल शांत होंगे, वरन सफर का आनंद लेना भी शुरू करेंगे।

सफलता नहीं सुख को चुनें
अपनी तरक्की करना अच्छी बात है लेकिन दूसरों को पछाडऩे की रुग्ण इच्छा पालना गलत है। एक साधारण मान्यता है कि स्वस्थ प्रतियोगिता प्रगति के लिए लाभदायी होती है। लेकिन क्या प्रतियोगिता स्वस्थ हो सकती है? स्वस्थ प्रतियोगिता कब रुग्ण हो जाए कहना मुश्किल है। आपने देखा होगा कि सफल व्यक्ति दुखी और उदास हो जाते हैं या दिल के मरीज होते हैं। क्यों? क्योंकि उनकी निगाह खुद की सफलता पर कम, दूसरे की विफलता पर अधिक होती है। बिजनेस में लोग सोचते हैं, मुझे लाभ हो न हो, मेरे प्रतिद्वंद्वियों को फायदा नहीं होना चाहिए। ऐसी सफलता दुख ही देगी। सफलता और सुख में कुछ चुनना हो तो सुख को चुनें क्योंकि सुखी आदमी स्वयं के साथ सफल होता है इसलिए जीवन उसे कभी विफल नहीं बना सकता।

अच्छा श्रोता होना, स्वस्थता की निशानी
यह युग बहुत बातून युग है। लोग निरर्थक बोलते रहते हैं। और जब वे बोल रहे हैं तो उसे सुनना भी पड़ता है। यह मन की अशांति का कारण बनता है। अधिक बोलना हमेशा नुकसान की वजह बनता है। ज्यादा बोलने से गलतफहमी पैदा होती है, लोग नाराज होते हैं। बातें उलझती हैं। शांति चाहते हैं तो कम बोलने की आदत डालें। जितना जरूरी है उतना ही बोलें। जितना आपके काम का है उतना ही सुनें। व्यर्थ ही पास-पड़ोस की खबरें, अफवाहें इत्यादि सुनने से कोई लाभ नहीं होता, उल्टे दिमाग में अधिक कचरा भर जाता है। बोलने और सुनने में संक्षिप्त रहें। अगर आप थोड़ा बोलें, थोड़ा सुनें तो धीरे-धीरे आप देखेंगे कि एक स्वच्छता, एक पवित्रता का भाव उभरने लगेगा। मानो आपने स्नान किया हो। आप अपने भीतर एक खाली स्थान पाएंगे जो कि ऊर्जा से लबालब होगा। ध्यान के लिए यह अत्यंत आवश्यक भूमि है।

सच बोलेंगे तो खुश रहेंगे
लोग मानते हैं कि इस समाज में सफल होने के लिए झूठ बोलना ही पड़ता है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि झूठ बोल-बोलकर आप स्वयं भी झूठ बन जाते हैं। आज जो दिल के मरीज इतने बढ़ रहे हैं उसका एक कारण यह झूठ का अंबार भी है। इस झूठ के नीचे हृदय कुचला जा रहा है। इस झूठ से बाहर निकलने के लिए ओशो एक ध्यान विधि बताते हैं, उसे करके देखिए। तीन बातें खयाल रखें- पहली, जब आप किसी से झूठ बोल रहे हैं, तत्काल बीच में ही रुककर उस व्यक्ति से क्षमा मांगिए। उसी वक्त उसे कहें, यह झूठ था, कृपा मुझे माफ करें। दूसरी, जब आप झूठ बोलने वाले हों तो उसी समय जाग जाएं। जैसे ही यह जुबान पर आए, उसी समय उसी स्थिति में इसे रोक दें। गहरी सांस लें, झूठ पिघल जाएगा। आप हल्का अनुभव करेंगे और तीसरी: जब आपके हृदय में झूठ उठने लगे तो उसी समय जाग जाएं। यदि आप जागरण के ये तीन चरण पूरे कर लेते हैं तो झूठ विदा हो जाएगा।

इंतजार और कृतज्ञता से खुद को संवारें
आज की दुनिया तेज रफ्तार वाली है। उस कारण लोगों में धीरज खो गया है, और साथ में कृतज्ञता भी। ये दोनों एक ही भावदशा के दो छोर हैं। लालच इतनी बढ़ गई है कि जो मिला है उसके लिए कभी धन्यवाद नहीं उठता। और अधैर्य इतना है कि लोग प्रतीक्षा करना भूल गए हैं। कोई भी एक मिनट भी रुकने के लिए तैयार नहीं है। इसीलिए लोग इतना परेशान रहते हैं। इस साल आप छोटी-छोटी बातों के लिए कृतज्ञ अनुभव करना सीखें। किसी ने चाय बना दी, किसी ने दरवाजा खोला, कहीं फूल खिला, हर बात पर धन्यवाद अनुभव करें। आपका हृदय भी खिलने लगेगा। और जो अभी घटा नहीं उसके लिए प्रतीक्षा करना सीखें। प्रतीक्षा करने से मस्तिष्क रिलैक्स होता है, मन शांत होने लगता है, दिल को सुकून सा मिलता है। समय की गति तो वही होगी, चीजें जब घटनी हों तभी घटेंगी, आपके अधैर्य के कारण आप चीजें अस्त-व्यस्त करते हैं।
शास्‍त्री चंद्रप्रकाश शर्मा 'चंद्र'
वार्षिक राशिफल-2017- मीन राशि : दौलत-शोहरत सबकुछ मिलेगा इस साल

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