विजया एकादशी का व्रत आज, भगवान विष्णु की होती है उपासना

हर एकादशी अपने आप में महत्वपूर्ण है। लेकिन विजया एकादशी अपने नाम के अनुसार विजय दिलाने वाली मानी जाती है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु की उपासना होती है। इस एकादशी का व्रत करने से आप भयंकर विपत्तियों से छुटकारा पा सकते हैं। बड़े से बड़े शक्तिशाली शत्रुओं को परास्त कर सकते हैं। इस बार विजया एकादशी का व्रत 6 मार्च यानी आज रखा जाएगा।

विजया एकादशी का शुभ मुहूर्त
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 मार्च को सुबह 6 बजकर 30 मिनट से लेकर 7 मार्च की सुबह 4 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के चलते विजया एकादशी का व्रत 6 मार्च के दिन ही रखा जाएगा। विजया एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6.41 बजे से सुबह 9.37 भजे तक रहेगा। जबकि व्रत पारण का समय 7 मार्च को दोपहर 01.43 बजे से शाम 4.4 बजे तक रहेगा।

विजया एकादशी की पूजा विधि
श्री हरी की स्थापना एक कलश पर करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक श्री हरि का पूजन करें। मस्तक पर सफेद चन्दन या गोपी चन्दन लगाकर पूजन करें। इनको पंचामृत, पुष्प और ऋतु फल अर्पित करें। चाहें तो एक वेला उपवास रखकर, एक वेला पूर्ण सात्विक आहार ग्रहण करें। शाम को आहार ग्रहण करने के पहले उपासना और आरती जरूर करें। अगले दिन प्रातःकाल उसी कलश का और अन्न वस्त्र आदि का दान करें।

विजया एकादशी पर करें ये गलतियाँ
इस दिन सूर्योदय से पहले उठे स्नान करके साफ हल्के रंग के कपड़े पहनें। काले रंग के कपड़े न पहनें। प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन का बिल्कुल भी प्रयोग ना करें। सुबह और शाम एकादशी की पूजा पाठ में साफ-सुथरे कपड़े पहन कर ही व्रत कथा सुने। नाखून काटने या बाल-दाढ़ी बनवाने से बचें। विजया एकादशी पर एक आसन पर बैठकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप जरूर करें।

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