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वास्तु टिप्स -रसोई घर यदि अग्निकोण में बनाना संभव न हो तो कहां बनाएं

वास्तु टिप्स -रसोई घर यदि अग्निकोण में बनाना संभव न हो तो कहां बनाएं

 जयपुर। वास्तु में भवन निर्माण को लेकर हर चीज का महत्व है। हर घर में रसोई होती है और रसोई आपके जीवन में महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। रसोई वह जगह जहां से आपको ऊर्जा मिलती है। आपके जीवन में रसोई महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि घर में रसोई सही जगह नहीं होती है तो उसमें बनने वाला भोजन न तो शरीर को ऊर्जा दे पाएगा और न ही मन को शांति दे पाएगा। रसोई में काम करने वाली गृहणियों के मन भी अशांत रह सकते हैं। कई बार गलत बनी रसोई के कारण घर में अग्निकांड जैसी घटनाएं भी सामने आई है। हालांकि कई बार अग्निकोण में बनी रसोई में भी अग्निकांड देखे गए हैं लेकिन उनमें अधिकांश मानवीय लापरवाही सामने आई होती है।
वास्तु का स्थापित सिद्धान्त है कि रसोई घर अग्निकोण में होगा लेकिन कई बार ऐसी परिस्थितियां बन जाती है कि अग्निकोण में रसोई का बनाया जाना संभव नहीं होता। कई बार आयताकार भूखण्डों में जो दक्षिणमुखी होते हैं, वहां पर घर का मुख्यद्वारा अक्सर मजबूरी में अग्निकोण में बनाना होता है। ऐसे में रसोई बनाने के लिए जगह मिलना मुश्किल हो जाता है क्योंकि दक्षिण मुखी मकान में दरवाजे के लिए अग्निकोण और नेऋत्य कोण ही मिलते हैं।
वास्तु के अनुसार नेऋत्यकोण में मुख्य द्वार बनाना उचित नहीं होता है। विकल्प की अवस्था में अग्निकोण में मुख्यद्वार बनाया जाता है। ऐसी स्थिति में भूखण्ड को चार भागों में बांटने के बाद अग्निकोण वाले चौथाई हिस्से में दरवाजे के आगे के हिस्से में ईशान कोण की सीमा तक रसोई बनाई जा सकती है। हालांकि ये पूरी तरह से ठीक नहीं है लेकिन मजबूरी में यहां रसोई बनाई जा सकती है। इसके अलावा दूसरा विकल्प भूखण्ड का वह चौथाई हिस्सा जो वावव्य कोण का हिस्सा माना जाता है। उसमें रसोई बनाई जा सकती है।
इस दिशा में रसोई बनाते समय ये ध्यान रखना जरूरी है कि रसोई में जो स्लैब बनाई जाएगी उसमें किस रंग का पत्थर उपयोग में लेना है। चूल्हे की दिशा भी सही होनी चाहिए और यहां लगने वाले सिंक और नलों की दिशा भी उचित होनी चाहिए। यहां ये ध्यान रखने वाली बात है कि ईशान और नेऋत्य में किसी भी सूरत में रसोई नहीं बनाई जाएगी अन्यथा भवन में निवासरत लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
दरअसल ईशान कोण जल का स्थान है और रसोई अग्नि की जगह है। ऐसे में ईशान की रसोई बड़ी मुसीबत साबित हो सकती है। इसी प्रकार नेऋत्य कोण भूमि का स्थान होता है। यहां भी अग्नि उचित नहीं रहती है। ..रसोई में क्या चीज कहां होनी चाहिए इस बारे में अगली बार जानकारी दी जाएगी।

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