श्रीगणेश की शुभ दृष्टि जीवन की सारी बाधाए दूर करेगी!

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय, गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।
विघ्नों को दूर करनेवाले, वरदान देनेवाले, देवताओं के प्रिय, बड़े उदरवाले, सर्वजगत की रक्षा करनेवाले, हाथी सदृश्य मुखवाले, वेद और यज्ञ के आभुषण, देवी पार्वती के पुत्र, ऐसे हैं गणों के स्वामी श्रीगणेश, आपको नमस्कार हो, नमस्कार हो!
हर माह में शुक्ल पक्ष की, अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है, जबकि पूर्णिमा के बाद आने वाली यानी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।
श्रीगणेश पूजा में शुद्ध भावना का विशेष महत्व है, इसलिए पवित्र मन से प्रार्थना करें, श्रीगणेश की शुभ दृष्टि जीवन की सारी बाधाएं दूर करेगी!
श्रीगणेश चतुर्थी के अवसर पर श्री गणेश की आराधना जीवन में विजय की पताका फहराती है। इस दिन सच्चे मन से भगवान श्री गणेश की पूजा करें, लडुवन का भोग लगाएं, श्री गणेश कृपा की कामना के साथ दूब अर्पित करें, सामर्थ्य के अनुसार व्रत करें और संभव हो तो दान-पुण्य करें, कथा सुने..जीवन सफल हो जाएगा।
जब हम कोई कार्य करते हैं तो उसका उद्देश्य होता है- विजय। जीवन में व्यक्ति हर समय विजय प्राप्त करने के लिए प्रयास करता है लेकिन विघ्न, विजय की राह में बाधा बनते हैं... श्रीगणेश की आराधना समस्त विघ्नों को समाप्त करती है और इसका सबसे अच्छा अवसर होता है हर माह की चतुर्थी।
 
श्रीगणेश चतुर्थी का पूजा-पर्व भगवान श्रीगणेश को समर्पित है, चतुर्थी का व्रत हर महीने होता है, लेकिन सबसे मुख्य चतुर्थी का व्रत भाद्रपद के महीने में होता है, संपूर्ण विश्व में इसे गणेश चतुर्थी यानी भगवान गणेशजी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है!
-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर

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