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गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन द्विपुष्कर योग, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन द्विपुष्कर योग, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली । सनातन धर्म में नवरात्रि के साथ ही गुप्त नवरात्रि का भी विशेष महत्व है। मंगलवार को गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है और इस दौरान द्विपुष्कर योग बन रहा है। यह दिन मां दुर्गा की गुप्त साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से अधिक गोपनीय होती है। इस दौरान साधक विशेष सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा की गुप्त रूप से आराधना करते हैं। गुप्त नवरात्रि में की गई साधना के नतीजों को कहीं अधिक शक्तिशाली भी माना जाता है। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है, क्योंकि इसके पांचों अंग � तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार किसी भी कार्य की शुभता तय करते हैं। दृक पंचांग के अनुसार 20 जनवरी को शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है जो 21 जनवरी की सुबह 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 6 मिनट तक रहेगा, उसके बाद धनिष्ठा शुरू होगा। योग की बात करें तो सिद्धि, शाम 8 बजकर 1 मिनट तक चलेगा। करण बालव है, जो दोपहर 2 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, फिर कौलव करण प्रारंभ होगा। मंगलवार को चंद्रमा मकर राशि में संचरण करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 50 मिनट पर होगा। इस दिन द्विपुष्कर योग दोपहर 1 बजकर 6 मिनट से 21 जनवरी की सुबह 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। द्विपुष्कर योग में किए गए शुभ कार्यों, पूजा-पाठ, व्रत या अन्य मंगल कार्यों के फल कई गुना बढ़ जाते हैं। शुभ मुहूर्त देखें तो ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, विजय मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त का भी संयोग बन रहा। इन समयों में पूजा या शुभ कार्य करना विशेष फलदायी होता है। किसी भी नए और शुभ काम करने के लिए अशुभ समय या राहुकाल का विचार महत्वपूर्ण है। राहुकाल दोपहर 3 बजकर 11 मिनट से 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। अन्य अशुभ काल में यमगंड 9 बजकर 53 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट और गुलिक काल 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।

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