पुत्रदा एकादशी: इस व्रत को रखने से योग्य संतान की कामना होती है पूर्ण, वहीं ये..

आज बुधवार 12 जनवरी 2022 को सायंकाल 4.49 मिनट से एकादशी की तिथि का आरंभ हो रहा है। पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के रूप में जाना जाता है। हिंदू धर्म ग्रन्थों में पुत्रदा एकादशी के व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से योग्य संतान की कामना पूर्ण होती है और संतान को संकटों से बचाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 13 जनवरी 2022, गुरुवार को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी के साथ ही वैकुण्ठ एकादशी और मुक्कोटी एकादशी के नामों से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस व्रत को महत्वपूर्ण माना गया है। धर्मग्रन्थों और पुराणों में कहा गया है कि इस दिन व्रत रखते हुए भगवान विष्णु की शास्त्र सम्मत विधि से पूजा करने पर निसंतान दंपत्तियों को संतान की प्राप्ति होती है। इस व्रत को रखने से योग्य संतान की कामना पूर्ण होती है। वहीं ये व्रत संतान को हर परेशानी से बचाने वाला माना गया है।

व्रत के लिए पूजा का मुहूर्त...

एकादशी तिथि का प्रारम्भ - 12 जनवरी 2022 को सायंकाल 4 बजकर 49 मिनट से होगा और एकादशी का समापन 13 जनवरी 2022 को सायंकाल 7 बजकर 32 मिनट पर होगा। इस एकादशी का व्रत 13 जनवरी 2022, गुरुवार को रखा जाएगा। पुत्रदा एकादशी व्रत के पारण का समय - 14 जनवरी 2022, शुक्रवार, प्रात:07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 14 जनवरी, रात्रि 10 बजकर 19 मिनट तक।


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