पितृपक्ष 2025-तृतीया तिथि का श्राद्ध आज, जानें मुहूर्त और विधि

पितृपक्ष हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का वह पखवाड़ा है, जो पितरों की स्मृति और उनके तर्पण को समर्पित होता है। इस दौरान परिवारजन अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए श्रद्धा और कृतज्ञता से तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन का आयोजन करते हैं। इस वर्ष तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर 2025 को किया जाएगा, जिसे तीज श्राद्ध भी कहा जाता है। पितृपक्ष का महत्व धर्मग्रंथों में बताया गया है कि हर मनुष्य पर तीन ऋण होते हैं�देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। इनमें से पितृ ऋण से मुक्ति पाने का मार्ग श्राद्ध कर्म माना गया है। माना जाता है कि पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। तृतीया श्राद्ध 2025 की तिथि और मुहूर्त �तृतीया तिथि प्रारम्भ: 9 सितंबर 2025, शाम 06:28 बजे �तृतीया तिथि समाप्त: 10 सितंबर 2025, दोपहर 03:37 बजे श्राद्ध के प्रमुख मुहूर्त: �कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:53 से दोपहर 12:43 (50 मिनट) �रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:43 से 01:33 (50 मिनट) �अपराह्न काल: दोपहर 01:33 से 04:02 (2 घंटे 30 मिनट) तृतीया श्राद्ध करने की विधि श्राद्ध के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पितृस्थान को गोबर से लीपकर गंगाजल से शुद्ध करें। महिलाएं स्नान के बाद सात्विक भोजन तैयार करें। ब्राह्मणों को पूर्व में आमंत्रित करें और उनके आने पर संकल्प लेकर पितरों की पूजा करें। तर्पण के समय जल में काला तिल मिलाकर अर्पित करें। अग्नि में गाय का दूध, घी, खीर और दही चढ़ाएं। चावल के पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करना शुभ माना गया है। इसके बाद ब्राह्मणों को पूरे सम्मान के साथ भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। श्राद्ध कर्म के अंत में कौओं, गाय और चींटियों को भोजन खिलाने का विधान है, जिसे पितरों तक अन्न पहुंचाने का माध्यम माना जाता है। पितृपक्ष में तृतीया श्राद्ध का विशेष महत्व है। यह दिन हमें यह स्मरण कराता है कि हमारी जीवन यात्रा पूर्वजों की कृपा और उनके आशीर्वाद से ही संभव है। श्राद्ध कर्म न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह कृतज्ञता और पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाने का भी माध्यम है।ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

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