होलिका दहन का मुहूर्त और पूजन विधि

होली हर वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनायी जाती है तथा भद्रारहित समय में होली का दहन किया जाता हैं। इस बार होलिका दहन 23 मार्च दिन बुधवार को है। आपको बता दें कि प्रदोष व्यापिनी फाल्गुन पूर्णिमा के दिन भ्रद्रारहित काल में होलिका दहन किया जाता हैं।
फाल्गुन का मास नवजीवन का संदेश देता है। यह उत्सव वसंतागमन तथा अन्न समृद्धि का दूत है। इसमें जहां गुझिया की मिठास है, वहीं रंगों की बौछारों से तन मन भी खिल उठते हैं। जहां शुद्ध प्रेम व स्नेह के प्रतीक, कृष्ण की रास का अवसर है वहीं होलिका दहन, अच्छाई की विजय का भी परिचायक है। सामूहिक गानों, रासरंग, उन्मुक्त वातावरण  का एक राष्ट्रीय, धार्मिक व सांस्कृतिक त्यौहार है। इस त्यौहार पर न चैत्र सी गर्मी है, न पौष की ठिठुरन, न आषाढ का भीगापन, न सावन का गीलापन बस वसंत की विदाई और मदमाता मौसम है। हमारे देश में यह सद्भावना का पर्व  है जिसमें वर्ष भर का वैमनस्य, विरोध, वर्गीकरण आदि गुलाल के बादलों से छंट जाता है जिसे शालीनता से मनाना चाहिए न कि अभद्रता से।

होलिका-दहन का मुहूर्त:-

इस बार 23 मार्च 2016, बुधवार को होली मनाई जाएगी। शास्त्रानुसार फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा के भद्रा रहित होने पर ही होलिका दहन करना शुभ माना गया है। होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सायंकाल 4 बजकर 55 मिनट से 5 बजकर 31 मिनट तक होगा। वहीं दूसरी तरफ कुछ विद्वान के अनुसार शुभ मुहूर्त गोधुलि वेला में शाम 6.36 से 6:  48 तक है।

पूजन विधि:-

होलिका दहन से पहले होली की पूजा की जाती है। जिस वक्त आप होली की पूजा कर रहे हों उस समय आपका मुख पूर्व या उतर दिशा की ओर होना चाहिए उसके पश्चात निम्न सामग्रियों का प्रयोग करना चाहिए। एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा नई फसल के धान्यों जैसे- पके चने की बालियां व गेंहूं की बालियां भी सामग्री के रुप में रखी जाती है। इसके बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल रख दें।
होलिका दहन मुहुर्त समय में जल, मोली, फूल, गुलाल तथा गुड आदि से होलिका की पूजा करें। गोबर से बनाई गई ढाल की चार मालाएं अलग से घर लाकर सुरक्षित रख लें इसमें से एक माला पितरों के नाम की, दूसरी हनुमान जी के नाम की, तीसरी शीतला माता के नाम की तथा चौथी अपने घर-परिवार के नाम की होती है।

होली होलिका पूजन के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:-
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:।
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम् ॥


होलिका दहन के पश्चात उसकी जो राख निकलती है, जिसे होली भस्म कहा जाता है, उसे शरीर पर लगाना चाहिए। होली की राख लगाते समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:-

वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रम्हणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि माँ देवी! भूति भूतिप्रदा भव॥


ऐसा माना जाता है कि होली की जली हुई राख घर में समृद्धि लाती है। साथ ही ऐसा करने से घर में शांति और प्रेम का वातावरण निर्मित होता है।

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