राशिनुसार करें ये उपाय, लक्ष्मीजी होंगी मेहरबान

सभी के मन में भौतिक सुखों की इच्छा और धन अर्जन की चाह होती है। कर्म की प्रकृति और प्रवृत्ती को सात्विक रखकर धन अर्जन करने और ऎश्वर्य में वृद्धि करने में कोई नकरात्मकता भी नही दिखती। वैसे भी श्रेष्ठ कमोंü से अर्जित किया हुआ धन, स्वयं का और परिवार का उत्थान तो करता ही है, साथ ही साथ समाज के लिये भी लाभदायक होता है।

शंकराचार्य जी ने "कनकधारा स्त्रोत्र" में, धन की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी जी को "शुभ कर्म फल प्रसुत्यै" कहकर सम्बोधित किया है। अर्थात ऎसी शक्ति जो व्यक्ति के शुभ और सात्विक कर्मों  का आंकलन कर के फल देती हैं। ज्योतिष शास्त्र एक ऎसा विज्ञान है, जो देव आराधना और रत्न विज्ञान की सहायता से व्यक्ति के कमों का सही सही फल दिला सकता है। सभी मनुष्य, कर्म तो करते हैं लेकिन ऎसा अक्सर देखा गया है, कि किसी को थोडे से कर्म से बहुत ज्यादा सुखों की प्राप्ति हुई और किसी का जीवन केवल कर्म में ही बीत गया। कर्म और प्रारब्ध ही मनुष्य को देव आराधना के लिये प्रेरित कर जीवन में श्रेष्ठ फल देते हैं। कर्म करने का अवसर भी सभी को नही मिलता, जिस से कि धन तथा लाभ का अर्जन किया जा सके।

अत: इसी अवसर को प्राप्त कर धन, समृद्धि और वैभव प्राप्त करने के लिये शास्त्रों में ज्योतिषीय उपाय वर्णित हैं, जिनका अनुसरण कर लाभ उठाया जा सकता है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र चन्द्र की गति और स्थिति पर आधारित है। किसी भी जातक की लग्न कुंडली में धन भाव, भाग्य भाव और आय भाव की स्थिति और पंचमेष तथा दशमेश के साथ इन तीनो स्थानो का तुलनात्मक अध्ययन कर राशी के अनुसार ऎसे उपाय अपनाये जा सकते है जिस से धन समृद्धि प्राप्त हो। जातकों को केवल इतना ध्यान रखना होगा कि वे जो रत्न धारण करें, उन से सम्बन्धित ग्रह उनकी कुंडली में वक्री, नीच के अथवा पाप ग्रह से युक्त न हों।

आप ऎसे बन सकते है धनवान-


मेष:- मंगल प्रधान मेष राशि के जातकों को धन धान्य से संपन्न रहने के लिये एक हीरा या उसका उपरत्न तथा नीलम या उसका उपरत्न नीली धारण करना चहिये। शनि मंत्र:- "ऊँ शं शनैpराय नम:" का जाप प्रतिदिन करना चाहिये।

वृषभ:- शुक्र प्रधान वृषभ राशी के जातकों को समस्त सुख सुविधाओं की प्राçप्त के लिये एक पन्ना या उसका उपरत्न तथा हीरा धारण करना चाहिये। "ह्रीं श्रीं ह्रीं"मंत्र का प्रतिदिन जाप करें।

मिथुन:- बुध प्रधान मिथुन राशी के जातकों को सुख शांति में उत्तरोत्तर वृद्धि के लिये एक मोती और पुखराज धारण करना चाहिये। गुरूवार को महामाया या लक्ष्मी नारायण के मन्दिर जाकर दर्शन करना चाहिये।

कर्क:- चन्द्र प्रधान कर्क राशी के जातकों को भावनात्मक सुख और समृद्धि के लिये एक मणिक्य और चान्दी का चन्द्रमा धारण करना चाहिये। प्रतिदिन शिवजी का अभिषेक "शिवाय ह्रीं" मंत्र से करना चाहिये।

सिंह:- सूर्य प्रधान सिंह राशी के जातकों को लोकप्रियता और ऎश्वर्य के साथ ही साथ धन लाभ के लिये एक पन्ना या उसका उपरत्न तथा अनंतमूल की जड धारण करना चाहिये। शनि को एक तिल के तेल का दीपक प्रतिदिन सांध्यकाल अर्पित करें।

कन्या:- बुध प्रधान कन्या राशी के जातकों को बौद्धिक योग्यता बढाकर धन अर्जन करने के लिये तथा समृद्धि के लिये एक हीरा या उसका उपरत्न, तुरमुली के साथ धारण करना चाहिये। श्री सूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ प्रतिदिन करना चाहिये।

तुला:- शुक्र प्रधान तुला राशी के जातकों को सौन्दर्य और आकर्षण बढा कर धन धान्य तथा समृद्धि प्राप्त करने के लिये एक मूंगा तथा विधारा की जड धारण करना चाहिये। हनुमान जी का स्तवन या "हं हनुमतये नम:" मंत्र का जाप प्रतिदिन करना चाहिये।

वृश्चिक:- मंगल प्रधान वृश्विक राशी की जातकों को अपना प्रभाव क्षेत्र बढाकर धन अर्जन करने के लिये पुखराज धारण करना चाहिये। चान्दी का चन्द्र दान कर के खिरनी की जड भी पहने। "ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायणाय ह्रीं श्री" मंत्र का जाप प्रतिदिन करें।

धनु:- गुरू प्रधान धनु राशी के जातकों को उच्च अधिकारियों की निकटता प्राप्त कर धन वैभव में वृद्धि के लिये एक मणिक्य और एक हीरा या उसका उपरत्न धारण करना चाहिये। काली जी के दर्शन कर "क्रीं क्रीं काल्यै क्रीं क्रीं" मंत्र का जाप करें।

मकर:- शनि प्रधान मकर राशी के जातकों को कर्म प्रधान जीवन का अनुसरण कर धन अर्जन करने के लिये नीलम या उसका उपरत्न नीली और एक पन्ना धारण करना चाहिये। श्री कृष्ण भगवान के दर्शन गुरूवार को करें। "रूक्मिणी पतये श्री कृष्णाय नम:" मंत्र का जाप करें।

कुम्भ:- शनि प्रधान कुम्भ राशी के जातकों को न्याय और सेवा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर धन और समृद्धि प्राप्त करने के लिये एक हल्दी की गांठ और आनेक्स धारण करना चाहिये। "श्रीमन महागणाधिपतये नम:" मंत्र का जाप प्रतिदिन करें।

मीन:- गुरू प्रधान मीन राशी के जातको को पद प्रतिष्ठा बढा कर धन समृद्धि और वाहन सुख प्राप्त करने के लिये, एक मूंगा तथा टोपाज धारण करना चाहिये। शिव जी का केसर युक्त दूध से "शिवाय नम:" मंत्र का उच्चारण करते हुए अभिषेक करना चाहिये।

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