दिशा ज्ञान से देखें घर का वास्तु...सुंदर कांड से सुधारें!

भवन के वास्तु में दिशा ज्ञान अत्यधिक महत्वपूर्ण है।  सही दिशा ज्ञान के अनुरूप ही किसी भी भवन का निर्माण हो सकता है तथा वास्तु दोष भी समाप्त किए जा सकते हैं। आमतौर पर दिशा ज्ञान के लिए मैग्नेटिक कम्पास... दिशा सूचक यंत्र का उपयोग किया जाता है लेकिन बगैर यंत्र के भी दिशाओं का ज्ञान आसान है।
सूर्योदय के समय सूर्य की तरफ मुंह करके खड़े होने पर... सामने पूर्व दिशा, दाएं हाथ की ओर दक्षिण दिशा, पीठ की ओर पश्चिम दिशा और बाएं हाथ की ओर उत्तर दिशा होती है। प्रमुख चारों दिशाओं के अलावा दिशाओं के मध्य की चार दिशाएं इस प्रकार हैं... उत्तर और पूर्व के बीच- ईशान, पूर्व और दक्षिण के बीच- आग्नेय, दक्षिण और पश्चिम के बीच- नैऋत्य, पश्चिम और उत्तर के बीच- वायव्य।
मैगनेटीक कम्पास का प्रयोग प्राचीनकाल से समुद्री यात्रा के दौरान नौका या जहाज में दिशा ज्ञान के लिए किया जाता रहा है। यह दिशा जानने का सबसे सरल और सही उपाय है।
प्रयास करें कि घर का वास्तु उत्तम हो लेकिन शत-प्रतिशत वास्तु दोष मुक्त भवन आज के युग में असंभव है क्योंकि हमारे जीवन में अनेक ऐसी वस्तुओं का प्रवेश हो चुका है जिन्हें भवन से हटाना संभव नहीं है।
* वास्तु दोष मुक्ति के लिए प्रतिवर्ष सुंदरकांड का आयोजन सर्वोत्तम उपाय है!
-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)

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