ये चंद उपाय करने से आएंगे अच्छे दिन

कई बार ग्रह आपके पक्ष में नहीं होते और हर काम बिगडने लगते हैं। ऐसे में देवों ने ज्योतिष और वास्तु उपायों के अलावा एक ऐसा प्रभावी उपाय बताया था, जो न केवल आसान है बल्कि प्रभावी भी है। पुराणों के अनुसार केवल गउ माता की पूजन करने और उसकी सेवा करने भर से सभी प्रकार के दोष और पीडाएं दूर हो जाती है। विष्णु पुराण में तो यह तक कहा गया है कि गाया की यदि भक्तिभाव से सेवा की जाए तो केवल और केवल 60 दिनों में बुरे दिन भी अच्छे दिनों में बदलने लगते हैं।

जन्म कुंडली में सूर्य नीच का अर्थात तुला राशि में या अशुभ स्थिति में हो अथवा शुक्र ग्रह नीच का अर्थात कन्या राशि में या अशुभ स्थिति में हो तो श्वेत रंग की गाय का पूजन करके रोटी खिलाने से ग्रहों की अशुभता दूर होती है।

कुंडली में गुरु ग्रह के नीच का अर्थात मकर राशि में या अशुभ स्थिति में होने पर गाय की पीठ पर बने कूबड़ या ककुदू का दर्शन करके गाय को रोटी में गुड और चने की दाल रखकर खिलाने से गुरु ग्रह शुभ प्रभाव देने लगते हैं।

प्राचीन काल से ही यह मान्यता रही है कि गौ माता में तैंतीस करोड़ देवताओं का वास होता है। भगवान श्री कृष्ण ने गौ पालक बनकर विश्व को गौ सेवा एवं रक्षा का संदेश दिया। पूजा कर्म के लिए गौ पूजन का अपना महत्व है।

वर या कन्या के विवाह के लिए गोधूलि का समय सर्वोत्तम माना जाता है। भोजन से पूर्व गाय के लिए रोटी अथवा गौ ग्रास निकालने की आज भी परंपरा चली आ रही है।

महर्षि पाराशर के अनुसार जिस घर में गौ सेवा होती है, वहां समस्त प्रकार के सुख अपने आप ही आने लगते हैं। गौ माता का दर्शन और स्पर्श शुभ माना गया है।

शकुन शास्त्र के अनुसार जिस घर के दरवाजे के सामने गाय झुंड बनाकर बैठी रहती हैं, उस घर के लोगों का भाग्य बदलने से वहां धन-धान्य, संतान, विद्या, आरोग्य सुख आदि की वृद्धि होने लगती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गाय के पूजन एवं दान से ग्रह दोषों का निवारण होता है। दूर होते हैं वास्तु दोष किसी भी घर के वास्तु दोषों को दूर करने के लिए गाय को घर में पालना, गाय के गोबर से घर को लीपना अथवा गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर उसपर शुद्ध घी और हवन सामिग्री डालकर निकलने वाले धुएं से पूरे घर को शुद्ध करना उपयुक्त होता है।

भवन निर्माण से पूर्व अगर बछड़े वाली गाय को भूखंड पर बांध दिया जाय तो गाय के मुख से जमीन पर गिरने वाले झाग या फैन से वास्तु दोषों का निवारण होता है। किसी जरूरी कार्य से घर से बाहर निकलने पर अपने बछड़े को दूध पिलाती गाय का दर्शन होना शुभ होता है।

अगर राहू ग्रह की युति सूर्य, चंद्र, मंगल या शुक्र ग्रह के साथ हो अथवा शनि, राहू या केतु के साथ सूर्य ग्रह स्थित हो अथवा मंगल ग्रह की युति राहू या केतु से हो तो कुंडली में पितृ दोष होता है। इस कारण जातक को जीवन में संघर्षों का सामना करना पड़ता है।

पितृ दोष को दूर करने के लिए प्रतिदिन अथवा प्रत्येक अमावस्या को गाय को रोटी, गुड व चारा खिलाना चाहिए। कमजोर ग्रह होते हैं मजबूत माना जाता है कि गाय के नेत्र में सूर्यदेव तथा नेत्रों की ज्योति में चंददेव का वास होता है।


कुंडली में अगर चंद्र और सूर्य ग्रह कमजोर स्थिति में होने के कारण कष्ट दे रहे हों तो गाय के नेत्रों का नियमित दर्शन करने से लाभ होता है। अगर किसी मनुष्य के हाथ में आयु रेखा टूटी हुयी, जंजीर नुमा या जाल युक्त हो तो गाय का पूजन करने के साथ-साथ गाय के घी का सेवन करना चाहिए।

कमजोर बुध ग्रह को मजबूत बनाने के लिए बुधवार को हरा चारा, पालक, मेथी, बथुआ या हरी मूंग खिलाना श्रेष्ठ उपाय है। बच्चों को नजर लगने से बचाने के लिए गाय के गोबर को जलाकर उस भस्म को बच्चे के माथे, गले, छाती और पीठ पर लगाने से लाभ होता है।

जिन कन्याओं के विवाह में बाधा आ रही हो, उन्हें प्रत्येक गुरूवार को भगवान विष्णु का तथा प्रत्येक सोमवार को माता गौरी का पूजन करके अपने हाथ से गाय को हल्दी और चने की दाल मिश्रित आटे की एक लोई खिलानी चाहिए।

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