मोरपंख और त्रिपुंड के साथ राजा की तरह सजे बाबा महाकाल, दिखी श्रीकृष्ण की छवि

उज्जैन । माघ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बुधवार सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। बाबा के अद्भुत दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन ब्रह्म मुहूर्त से ही देखने को मिली और पूरा परिसर बाबा के जयकारों से गूंज उठा। माघ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बाबा का अद्भुत शृंगार हुआ। भक्त बाबा का अद्भुत शृंगार देखकर खुशी से गदगद दिखे। बाबा महाकाल मोरपंख और त्रिपुंड सजाए राजा की तरह लगे, जिनके चेहरे पर भगवान श्री कृष्ण की छवि भी देखने को मिली थी। पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए और गर्भगृह में मौजूद बाकी देवी-देवताओं की पूजा की, जिसके बाद बाबा पर घी, जल, दूध, दही और रस से जलाभिषेक किया और भांग की सहायता से बाबा का शृंगार किया। बाबा के माथे पर चांदी का त्रिपुंड लगाकर मोरपंख से अद्भुत शृंगार किया गया और फिर भक्तों के समक्ष भस्म आरती हुई। आज के शृंगार बहुत अद्भुत थे क्योंकि बाबा महाकाल में बाबा और भगवान विष्णु, यानी हरि और हर का रूप, एक में ही देखने को मिला। ऐसा अद्भुत रूप बाबा का सावन के महीने में ही देखने को मिलता है। भस्म आरती का आनंद लेने के लिए भक्तों ने देर रात से ही लाइन में लगकर अपने ईष्ट देव बाबा महाकाल के दर्शन किए। रोज की तरह आज भी बाबा महाकाल भी भक्तों को दर्शन देने के लिए सुबह 4 बजे जागे। भक्तों ने इन दर्शनों का लाभ लिया जिससे पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया। बता दें कि महाकाल मंदिर में हर दिन बाबा का शृंगार अलग तरीके से किया जाता है। हर तिथि और शुभ दिन के अनुसार बाबा नए रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं, और यही वजह है कि भस्म आरती में सबसे ज्यादा श्रद्धालु शामिल होते हैं। बाबा की सेवा में सुबह से लेकर शाम तक 6 आरतियां शामिल होती हैं, जो अपने आप में अनोखी होती है। भस्म आरती और शृंगार सुबह 4 बजे होते हैं, और भक्तों को 2 बजे ही मंदिर परिसर की लाइन में लगना पड़ता है। भस्म आरती 6 आरतियों में से सबसे विशेष आरती है।

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