दीपावली के दिन इन टोने-टोटके से बचें

दीपावली की रात महानिशा मानी जाती है। दिवाली की रात हर गल के चौराहे, पीपल के पेड के नीचे टोने-टोटके किए जाते है। अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करते है। लेकिन इन टोटकों की बजाए आसान तरीकों से भी आपकी इच्छा पूरी हो सकती है। आइये जानते है किस टोटके की जगह कौन सा आसान उपाय करके मनोकामना पूरी हो सकती है।

ऎसा देखने मे आया है कि जिन महिलाए के संतान नहीं होती अथवा जन्म लेने से पहले ही पेट मे मर जाती है, वह महिलाए मां बनने की इच्छा के लिए कई तरह के टोने-टोटको का सहारा लेती है। ऎसे नि:संतान महिलाए जिनके घरों में छोटे बच्चे रहते है, उन घरों के बाहर अथवा मुख्य दरवाजे की देहलीज पर, दीपावली अथवा दशहरा की रात्रि के बाद से गुंथी हुई आटे की लोई बना कर रखना शुरू कर देती है। अगर ऎसी महिलाए इस टोटके की जगह गाय के बच्चे को गु़ड खिलाऎं एवं गाय के स्थान के पास घी का दीपक जलाऎं, तो भी उनकी इच्छा पूरी हो सकती है।

कई बार नि:सन्तान महिलाए बच्चों की पाने की चाह में असा-पडोंसी के छोटे बच्चों को अपने घर बुलाकर उन बच्चों के सिर के बाल काट लेती हैं अथवा धोखे से बच्चे वाली महिलाए के बाल काट कर उन पर कई तरह के प्रयोग सम्पत्र करती है। अगर ऎसी महिलाएं अनाथालयों में जाकर खाना खिलायें तथा पीपल के वृक्ष के नीचे एक अमावस्या से लेकर दूसरी अमावस्या तक घी का दीपक जलाकर रखती रहें, तो उनकी इच्छा पूरी हो सकती हैं।

बहुत सी नि:सन्तान महिलाएं बच्चों की चाह में दूसरो के छोटे बच्चों को धोखे से अपने घर बुलाकर उन्हें कोई सफेद चीज जैसे कि दही-दूध, खीर आदि खिला देती हैं। यह एक ऎसा टोटका माना जाता है कि अपने ऊपर की बुरी आत्मा बला को दूसरे, के सिर चढा देना, कोई चीज खिलाना बुरी बात नहीं, परंतु खिलाने के पीछे उद्देश्य नेक हो, तो ही ठीक होता है।

अपनी बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए भी लोग नाना प्रकार के टोने-टोटको करते है। इसके लिए वह बीमार व्यक्ति के हाथ से काला कपडा अथवा उडद दाल या फिर हरी-सब्जियां दान करवाते हैं। बीमार व्यक्ति के हाथ का स्पर्श करवा कर तेल दान करते हैं, कांसे के बर्तन का दान करते है, गुडदान कर दूसरों को देते हैं अथवा गाय आदि को खिला देते हैं।

कुछ लोगों को दूसरों के घर से रात्रि के समय दही मांग कर अपने घर लाने की आदत रहती है। यह भी एक टोटका है। इसके पीछे यही विश्वास काम करता है कि दही की जाक निरन्तर दही जमाती रहती है, ठीक वैसे ही मांगा हुआ दही भी घर में निरन्तर वृद्वि करता है। दही मांगने की यह आदत भारत मे ही नहीं अनेक यूरोपियन देशो में भी खूब लोकप्रिय है।

पशुओं के बीमार पडने अथवा कम दूध देने पर भी कई तरह से टोने-टोटके किए जाते है इसके लिए पशु बांधने का खूंटा तक बदल दिया जाता है।

घर मे सुख-समृद्धि एवं धन का संचय बढाने के लिए भी कई तरह के टोटके किए जाते है। दीपावली के को ग्यारह गोमती चक्र लाकर, सिन्दूर के साथ लाल वस्त्र में बांध कर रखने से घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

पंच लक्ष्मी चक्र और दो अकीक पत्थरों को धूप देकर घर के बाहर चौखट पर छिपा कर रख देने से धन-संपदा की वृद्धि होने लग जाती है।

कच्ची मिट्टी के ध़डे में थोडी सी जौ, पांच सिक्के और भेरव मुठिया रखकर अगर किसी चौराहे पर रख दिया जाए, तो उससे गृह क्लेश की शांति तो हो जाती है, साथ ही धन आगमन के भी नये-नये स्त्रोत खुलते जाते हैं।

दीपावली की रात्रि को अगर एक लाल रंग के वस्त्र में पांच पीली कौडी बांध कर एवं उन्हे लौवान की घुप दिखाकर, अगले दिन बतासे के साथ किसी कुऎं मे डाल दिया जाए, तो परिवार में चल रही कई असाध्य बीमारियां शीघ्र ही दूर हो जाती हैं।

जिन कन्याओं का विवाह किसी कारण से नहीं हो पा रहा हो, अगर वह दीपावली के अवसर पर मौल श्री की जड को घर लाकर व लाल रेशमी वस्त्र में बांघ कर उसे भी लक्ष्मी-गणेश पूजन के समय चौकी पर रख दें तथा पूजनोपरान्त उसे घर की मुख्य चौखट पर बांध दें तो तीन महीने के भीतर ही घर में वह मांगलिक कार्य हो जाता है।

सूअर के दांत को लुवांन की गंध देकर होली, दीपावली के अवसर पर गले या कमर में गांध दिया जाएं, तो महिलाए की बंध्यत्व सम्बन्धी समस्या का निदान हो जाता है। सूअर का दांत बच्चों को दूसरों की बुरी नजर से बचाये रखने में भी मददगार रहता है।

जिन महिलाओं की प्रथम संतान पुत्र के रूप में हो, अगर वह, प्रसव के साथ बाहर आनेवाली नाल को सुखाकर तिजोरी या अलमारी आदि मे संभाल कर रख लें, तो उस घर में निरन्तर धन-धान्य की वृद्वि होती है। इस नाल को प्रत्येक दीपावली के दिन धूप दिखाना जरूरी होता है।

मोर के सिर पर जो कलगी होती है। अगर उसे काट कर सुलेमानी अकीक के साथ एवं गूगल धूप देकर अपने पास रख लिया जाय तो वह व्यक्ति सबका चेहता बन जाता है। उस व्यक्ति मे ऎसी कुछ आकर्षण शक्ति विकसित हो जाती है कि, जो भी उस व्यक्ति के सम्पर्क में आता है, वह उसी का बन कर रह जाता है। इस मोर की कलगी एवं सुलेमानी अकीक को भी प्रत्येक होली, दीपावली को गूगल धूप देना जरूरी होता है।

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