धर्मधारणा के अनुसार- इष्टि के दिन यज्ञ करते हैं!

शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम् ।
लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम् ॥
इष्टि- 31 दिसम्बर 2024
धर्मधारणा के अनुसार- अन्वधान और इष्टि अनिवार्य पर्व हैं. अन्वधान के दिन- एक दिन का उपवास रखा जाता हैं और इष्ट के दिन यज्ञ करते हैं. इस दिन भगवान श्रीविष्णु के भक्त उनका आह्वान करते हैं और व्रत कर उनकी पूजा करते हैं. धर्मग्रंथों में भगवान श्रीविष्णु का एक नाम यज्ञ है, इष्टि के दिन इन्हीं भगवान श्रीविष्णु के निमित्त यज्ञ किया जाता है.
इस दिन प्रातःकाल पवित्र स्नान आदि करके साफ, स्वच्छ, धुले हुए वस्त्र धारण करें पूजा का संकल्प करें. भगवान श्रीविष्णु तथा श्रीलक्ष्मी की पूजा करें तथा हवन करें. यथाशक्ति दान-पुण्य करें.
यह पर्व भौतिक सुख और अध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करनेवाला है, दुर्भाग्य दूर करके समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करनेवाला है!
-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)

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