धन को अक्षय और दोगुना करने के लिए करें अक्षय तृतीया को ये खास उपाय

‘अक्षय तृतीया’ एक पवित्र उत्सव व मंगलमय पर्व है। इस साल यह पर्व 28 मई को मनाया जाएगा। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है, कभी भी नष्ट न होने वाला। इस कारण ही ‘अगस्त्य संहिता’ एवं ‘भविष्य पुराण, विष्णुधर्मसूत्र, मत्स्यपुराण और नारद पुराण’ में अक्षय तृतीया के महत्त्व को वर्णित करते हुए इसे अनंत पुण्य फलदायी कहा गया है।


अबूझ है अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया तिथि अनेक मांगलिक कार्यों के लिए प्रशस्त मानी जाती है। इसे ज्योतिष शास्त्र में ‘अबूझ’ माना गया है। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन किए सभी कर्मों का फल अक्षय हो जाता है, इसीलिए इस तिथि का नाम ‘अक्षय’ हो गया। लोकभाषा में इसे ‘आखा तीज’ कहा जाता है। संस्कार युक्त कार्य यथा-नामकरण, अन्न प्राशन, चौलकर्म संस्कार अर्थात मुंडन संस्कार, कर्णवेध, यज्ञोपवीत व वेदारंभ आदि संस्कार करने के लिए अत्यंत श्रेष्ठ दिन माना जाता है।

अक्षय तृतीया पर करें जप-दान

अक्षय तृतीया को अपने कल्याण के लिए किसी भी व्यक्ति को ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ के 1100 जप करने चाहिए। ‘रां रामाय नम:’ मंत्र से 1100 आहुतियां लगाकर हवन करने के पश्चात भोजन करने वाले व्यक्ति के रुके काम अतिशीघ्र पूरे हो जाते हैं। साथ ही सौभाग्यवती महिलाओं को अपने सौभाग्य में वृद्धि करने के लिए जल से भरा घड़ा, चप्पल-जूता, छाता, गौ दुग्ध व फल सत्य व धर्म के आचरण में लगे हुए ब्राह्मण को देनी चाहिए। जिन लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता हो उन्हें इस दिन भगवान शंकर का अभिषेक और महामृत्युंजय के जप करने चाहिए। इसके साथ ही ओम जूं स:’ मंत्र के सवा लाख जप करवाने चाहिए। भगवान शंकर की पूजा करने के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है।

कष्टकारक ग्रहों के दान
सूर्य नीचगत, शत्रुक्षेत्रीय अथवा अशुभ कारक हो तो नैवेद्य के साथ गेंहू का सत्तू, लालचंदन, गुड़, लालवस्त्र, ताम्रपात्र तथा फल-फूल का मंदिर में दान दें। आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। चंद्रमा अनिष्टकारक हो तो, दो घड़ों में जल भरें, एक में एक चुटकी चावल और दूसरे में तिल डालकर मंदिर में दे दें। चावल, घी, चीनी, मोती, शंख, कपूर का दान करें। मंगल की शुभता के लिए जौ का सत्तू, गेहूं, मसूर, घी, गुड़, शहद, मूंगा आदि का दान करें। बुध की अनुकूलता के लिए हरा वस्त्र, मूंग दाल, हरे फल तथा सब्जी का दान करें। गुरु की प्रसन्नता के लिए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें, केले के पेड़ में हल्दी मिश्रित जल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं। केला, आम, पपीता का दान दें। शुक्र शांति के लिए सुहागिनों को वस्त्र एवं श्रंृगार सामग्री देकर सम्मानित करें। सत्तू, ककड़ी, खरबूजा, दूध, दही, मिश्री का दान करें। शनि-राहु के लिए एक नारियल को मोली में लपेट कर सात बादाम के साथ दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। गुड़ तथा दूध मिश्रित मीठा जल पीपल में चढ़ाकर तेल का दीपक अर्पित करें। केतु अनिष्टकारक हो तो सप्त धान्य, पंखे, खडाऊ, छाता, लहसुनिया और नमक का दान करें। इनके अलावा संबंधित अशुभकारक ग्रहों के मंत्र जप करें जो सर्वविदित हैं।

अक्षय तृतीया के दिन किए जाने वाले उपाय
काली हल्दी, पांच सुपारी, पांच कौडीयां तथा सात गोमती चक्र गंगाजल से शुद्ध करके लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें।
एक चांदी की डिब्बी में कामिया सिंदूर भर लें इसके अंदर पीली कौडी, श्रीयंत्र और कमल के फूल का टुकड़ा डालकर बंद कर दें। इसे अपने घर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, दुकान आदि में रखने से धन समस्या नहीं रहेगी।
पांच गोमती चक्र लाल कपड़े में मोली से बांधकर दुकान के प्रवेश द्वार पर इस प्रकार बांध दें ताकि ग्राहक उसके नीचे से निकलें।
स्मरण शक्ति के लिए, सरस्वती यंत्र को छह मुखी रुद्राक्ष के साथ गले में धारण करें। छह मुखी रुद्राक्ष के स्वामी कार्तिकेय और संचालक ग्रह शुक्र हैं जो विद्या और ज्ञान के प्रदाता हैं। सर्वकार्य सिद्धि हेतु मां आदि शक्ति सिद्ध बीसा यंत्र गले में धारण करें।
रोग निवारण के लिए पांच फलों के रस से रुद्राष्टाध्यायी के पंचम अध्याय के प्रथम 16 श्लोकों से शिवलिंग पर अभिषेक करें।
सुखी दांपत्य के लिए शुक्रवार के दिन शुद्ध जल में थोड़ी शक्कर मिलाएं और प्रातकाल शिव लिंग पर अर्पण करें तथा इत्र में भिगोकर सात अगरबत्ती व देशी घी का दीपक जलाएं।
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