सफलता और सम्पन्नता के लिए सूर्योपासना के समय जपें ये खास मंत्र

धर्म शास्त्रों में भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। सूर्य उपासना से न केवल सुख-समृद्धि आती है, बल्कि यश भी बढ़ता है।


महिलाओं को रविवार और सोमवार को सूर्योपासना से घर में समृद्धि व गर्भवती महिलाओं को गुणी पुत्र की प्राप्ति होती है। बह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इन दिनों में खेजड़ी के पेड़ के नीचे प्रात: काल सूर्योपासना करते हुए इस मंत्र का 51 बार जाप करने से लाभ मिलता है-
नम: उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम:।
नम: पद्मप्रबोधाय प्रचंडाय नमोऽस्तु ते ।।
ओम आदित्याय नम: ।

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आत्मबल, बुद्धि, इन्द्रियों में सौम्यता, शिष्टता, काम, क्रोधादि शमन व मानसिक पीड़ा से मुक्ति के लिए इन महीनों में आने वाले हर रविवार को खेजड़ी के नीचे सूर्य के सामने बैठ इस मंत्र का 51 बार वाचन करें। पेड़ के नीचे की मिट्टी को लाकर घर में फेंकना शुभ होता है।

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ओम नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम: ।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम: ।।
ओम सूर्याय नम:।

जिन महिलाओं को संतान सुख न हो, ऐसी महिलाओं को आंवले के पेड़ के नीचे अथर्ववेद के इस मंत्र का 101 बार जाप व सूर्य देव को जल सिंचन करने से संतान प्राप्ति सुख संभव है-
परिहस्त विधारय योनिं गर्भाय धातवे।
ओम भास्कराय नम:।


नीलें रंग के अपराजिता (विष्णुकान्ता ) नामक पौधे के नीचे इस मंत्र का जाप करने से घर के मुकदमेबाजी व न्यायालय में विजय, घर में समृद्धि व स्नायु तंत्र (नर्वस सिस्टम), चर्म रोग व श्वसन संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है। इस पौधे के न होने की दशा में पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर सूर्य को जल सिंचन कर इस मंत्र का 101 बार जाप करें -
ओम विश्वानिदेव सवितु: दुरितानि परांसुव: यद् भद्रं तन्नासुव:।
सूर्य कृणोतु भेशजं चन्द्रमा वोऽपोच्छतु ।।
ओम सूर्याय नम:।


दीर्घायु व हृदय संबंधी बीमारियों के लिए आश्विन व कार्तिक मास के प्रति रविवार बड़, ढाक, अशोक या सूर्यमुखी पौधे के नीचे आदित्य हृदय स्तोत्रम का पाठ करें या अथर्ववेद के इस मंत्र का 51 बार जाप करें -
उत सूर्योदिव एति पुरो रक्षांसि निजूर्वन्।
ओम भानवे नम:।


कुशाग्र बुद्धि, इंटरव्यू में सफलता व शिक्षा से जुड़े पक्षों तथा वायु संबंधी रोगों के निवारण के लिए अथर्ववेद के इस मंत्र का पीपल के पेड़ के नीचे प्रात: काल हर रविवार इस मंत्र के जाप से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
यं जीवमष्नवामहै न स रिष्याति पुरुष: ।
त्वं सूर्यस्य रश्मिभिस्त्वं नोअसियज्ञिया।।
ओम सूर्याय नम:।

 
पंडित हरीओम शास्त्री

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