पितृदोष होंगे इन चंद उपायों से दूर, परेशान ना हों

जन्म कुंडली में सूर्य के पीडि़त होने को पितृ दोष कहा जाता है। पितृदोष के कारण जातक को धन हानि, संतान कष्ट, संतान जन्म में बाधाएं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्‍हें चंद उपायों से दूर किया जा सकता है।


जन्म कुंडली में सूर्य के पीडि़त होने को पितृ दोष कहा जाता है। पितृदोष के कारण जातक को धन हानि, संतान कष्ट, संतान जन्म में बाधाएं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुंडली का दशम भाव पिता से सम्बंध रखता है।
दशम भाव का स्वामी यदि कुंडली के छठे, आठवें या बारहवें भाव में बैठा हो तथा गुरु पाप ग्रह से प्रभावित हो या पापी ग्रह की राशि में हो और लग्न व पांचवें भाव के स्वामी पाप ग्रह से सम्बन्ध बनाते हों तो भी पितृदोष माना जाता है।
पंचम भाव का स्वामी यदि सूर्य हो और वह पाप ग्रह की श्रेणी में हो और त्रिकोण में पाप ग्रह हो अथवा उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो इसे पितृदोष प्रभावित कहा जाता है। कमजोर लग्न का स्वामी यदि पांचवें भाव में हो और पांचवें भाव का स्वामी सूर्य से सम्बन्ध बनाता है तथा पंचम भाव में पाप ग्रह में हो तो भी पितृदोष कहलाता है।

कैसे होंगे पितृदोष दूर
अमावस्या के दिन अपने पूर्वजों के नाम पर मन्दिर में दूध, चीनी, श्वेत वस्त्र व दक्षिणा आदि दें।
पीपल की 108 परिक्रमा निरंतर 108 दिन तक लगाएं।
परिवार के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु होने पर उसके निमित्त पिंडदान अवश्य कराएं।
ग्रहण के समय दान अवश्य करें। जन कल्याण के कार्य करें, वृक्षारोपण करें। जल की व्यवस्था में सहयोग दें।
पितृदोष निवारण के लिए विशेष रूप से निर्मित यंत्र लगाकर एक विशेष यंत्र का 45 दिन विधिवत पाठ करके गृह शुद्धि करें।
श्रीमद्भागवत का पाठ करें या श्रवण करें। इससे पितृदोष समाप्त हो जाता है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनके आशीर्वाद से हमारा परिवार जो वास्तव में उनका ही एक अंश है सुखी हो जाता है।
पितर दोष के लिए बृहस्पति की पूजा, पीपल ब्रहमा की पूजा तीन महीने करें। रोज प्रातः इतवार को छोड़कर दूध जल चीनी मिलाकर पीपल की जड़ में डालें तथा कच्चा सूत लपेटें। हल्दी जैसे पीले रंग का प्रसाद बांटे, अपने बुजुर्गों की सेवा करें।
नीला पुखराज नौ या बारह रत्ती का धारण करें और घर में नारायण बलि का हवन पाठ कराएं।

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