कालसर्प योग से हैं पीडित तो घबराएं नहीं, नाग पंचमी को करें 10 खास उपाय, दोष होगा तुरंत दूर

कालसर्प दोष मुख्य रूप से 12 प्रकार का होता है, इसका निर्धारण जन्म कुंडली देखकर ही किया जा सकता है। प्रत्येक कालसर्प दोष के निवारण के लिए अलग-अलग उपाय हैं। यदि आप जानते हैं कि आपकी कुंडली में कौन का कालसर्प दोष है तो उसके अनुसार आप नागपंचमी के दिन उपाय कर सकते हैं। कालसर्प योग या कालसर्प दोष निवारण के कुछ उपाय, जिन्हें करने से आप पा सकते है इस दोष से छुटकारा-


108 नारियल पर चंदन से तिलक पूजर कर ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः इस मंत्र का 108 बार जाप कर पीडि़त व्यक्ति के ऊपर से उसार कर बुधवार को नदी या बहते हुए जल में प्रवाहित करने चाहिये, इससे कालसर्प दोष निवारण होता है।

किसी भी माह के प्रथम बुधवार से नीले कपड़े में काली उड़द बांध कर वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करें। परिक्रमा के बाद उसे उड़द दान किसी को दान कर देनी चाहिये। ऐसा लगातार 72 बुधवार करना चाहिये।

अभिमंत्रित कालसर्प योग यंत्र पर राहू की होरा में चंदन का इत्र लगाना चाहिये।

कालसर्प के जातक को इस दोष से मुक्ति प्राप्ति हेतु नागपंचमी को सपेरे से अपने धन से नाग-नागिन के जोड़े को पूजन के बाद मुक्त करवा देना चाहिये।

प्रथम बुधवार से आरंभ कर लगातार आठ बुधवार को क्रमशः स्वर्ण, चांदी, तांबा, पीतल, कांसा, लोहा, रांगे व सप्तधातु के नाग-नागिन के जोड़े को पूजन के बाद दूध के दोने में रख कर बहते जल में प्रवाहित करना चाहिये । ग्रहण काल में निम्न मंत्र के जाप से पूजन का सप्तधातु के नाग-नागिन बनवा कर जल में प्रवाहित करना चाहिये।

ग्रहणकाल में किसी ऐसे शिव मन्दिर की पिण्डी पर पंचमुखी नाग की तांबे की मूर्ति लगवानी चाहिये जिस पर पहले से नागदेव न हों तथा पीले फूल से पूजा कर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिये। इसमें यह अवश्य ध्यान रखना चाहिये कि आपको यह पूजन करते हुए कोई देखे नहीं।

प्रत्येक शिवरात्रि, श्रावण मास अथवा ग्रहण काल में शिव अभिषेक अवश्य करना चाहिये। 09 .--मोर अथवा गरुड़ का चित्र बनाकर उस पर विषहरण मंत्र लिखकर उस मंत्र के दस हजार जाप कर दशांश हवन के साथ ब्राह्मणों को खीर का भोजन करवाना चाहिये ।

नियमित रूप से श्री हनुमानजी की उपासना के साथ शनिवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ के साथ एक माला ऊँ हं हनुमंते रुद्रात्मकाये हुं फट् का जाप करने से भी लाभ प्राप्त होता है।

एक
वर्ष आटे अथवा उड़द के नाग बना कर उसके पूजन के बाद नदी में प्रवाहित करने के एक वर्ष बाद नागबलि करवायें।

मार्ग
में यदि कभी मरा हुआ सर्प मिल जाये तो उसका विधि-विधान से शुद्ध घी से अन्तिम संस्कार करना चाहिये । तीन दिन तक सूतक पालें और सर्पबली करवाये ।


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