मंत्र और जड़ी बूटियों से खोलें तरक्की के दरवाजे

ज्योतिष तो इस बात का हमेशा पक्षधर रहा है लेकिन अब विज्ञान भी इस बात को मानने लगा है कि जड़ी-बूटी और मंत्रों के जरिए भी ग्रह क्ले श से निपटारा और शांति पाई जा सकती है। कैसे जानें जरा-यदि

आप चिड़चिड़ापन, ज्वर, मान-सम्मान में कमी, राज्य की ओर से विरोध, झूठे आरोपों से पीडि़त हैं, तो जातक का सूर्य ग्रह खराब चल रहा है। ऐसे में जातक रविवार को बिल्वपत्र की जड़ लाल कपड़े में प्रात: दाहिने हाथ में बांधे तो सूर्य के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। साथ ही ओम हां हीं हौं स: सूर्याय नम: का जाप लाभ देता है।
मानसिक
असंतोष, नींद में स्त्री और जल से भय आदि स्वप्न, जल से होने वाले पेट संबंधित रोग, मातृप्रेम में कमी हो तो ऐसा जातक चंद्र ग्रह से पीडि़त होगा। इन्हें खिरनी की जड़ को सफेद कपड़े में बांधकर किसी भी पूर्णमासी को सायंकाल गले में धारण करना चाहिए। ऐसे जातकों को ओम श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम: का जाप करना चाहिए।
किसी
काम में लगातार विफलता, ज्वर और रक्तविकार होना, रक्तदोष के कारण बीमारी होना, क्रोध की अधिकता हो तो ऐसे जातक मंगल ग्रह से पीडि़त होते हैं। इन्हें अनंतमूल की जड़ लाल वस्त्र में बांधकर लाभ के चौघडिए में गले में धारण करनी चाहिए। साथ ही ओम क्रां क्रीं कौं स: भौमाय नम: का जाप भी करना श्रेष्ठ होता है।
मान
-सम्मान की हानि, रोजगार संबंधित परेशानी, विवाह में देरी, पेट में पीड़ा और व्यर्थ की लंबी यात्राएं होती हों तो जातक का बृहस्पति ठीक नहीं है। ऐसे जातक को केले की जड़ या हल्दी की गांठ पीले वस्त्र में अमृत के चौघडि़ए में गले में धारण करनी चाहिए। ओ ग्रां ग्रीं ग्रौ स: गुरूवे नम: मंत्रजाप लाभ देता है।
स्त्री
सुख में कमी, स्त्री का रोगी होना, गुप्त रोगों का बढऩा, विवाह में बाधा आ रही हो तो जातक का सूर्य कमजोर माना जाता है। ऐसे में सरपोंखा की जड़ सूर्योदय काल में गले में धारण करनी चाहिए। ओम द्रां द्रीं द्रौ स: शुक्राय नम: का भी करें।
शरीर का निस्तेज होना, पारिवारिक क्लेश होना, धन का नाश, काम में विफलता, शोक से ग्रसित होना, दरिद्रता, व्यापार में घाटा शनि की नाराजगी दिखाता है। ऐसे जातक बिच्छू बूंटी की जड़ काले धागे में अभिजीत मुहूर्त में गले में धारण करें और ओम प्रां प्रीं प्रौ स: शनये नम: का जाप करें।

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