कितना जानते हैं आप पुनर्जन्म के बारे में

हर कोई शख्स अपने पिछले जन्म और आने वाले जन्म के बारे में जानने को उत्सुक रहता है। ज्योतिष में मनुष्य के जन्म से लेकर, उसकी मृत्यु तक और फिर मृत्यु से लेकर, उसके पुनर्जन्म तक की हर बात को ग्रहों और नक्षत्रो के आधार पर बताया गया है।


ज्योतिष के पास हर सवाल का है जवाब
शास्त्रों और पुरानो में लिखा है कि मनुष्य को अपने कर्मों के फल इसी धरती पर भोगने पड़ते हैं क्योंकि मनुष्य की आत्मा अमर होती है तो वो एक शरीर के नाश होने के बाद दूसरे शरीर में प्रवेश कर लेती है और इस तरह से वो आत्मा अपने पाप और पुण्य कर्मो का फल भोगने के लिए ही पुनर्जन्म लेती है। पुराणों में ये भी लिखा है कि मनुष्य को अपने कर्मो के अनुसार 84 लाख योनियों को भोगना पड़ता है। पुनर्जन्म के बारे में सभी सवालों के जवाब आपको आपकी कुंडली के आधार पर ज्यो्तिष देता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली का पंचम भाव, पंचम भाव का स्वामी और पंचम भाव से स्थित बलवान ग्रह (सूर्य या चंद्रमा) का द्रेष्काण और उसकी स्थिति ही पुनर्जन्मन के बारे में बता सकता है। महर्षि पराशर के ग्रंथ बृहतपराशर होरा शास्त्र के अनुसार आपके जन्म से ही जो ग्रह (सूर्य या चंद्रमा) बलवान होगा, वो ग्रह जिस ग्रह के द्रेष्काण में स्थित हो, उस ग्रह के अनुसार ही जातक का संबंध उस लोक से था अर्थात आपकी कुंडली के पंचम भाव के स्वामी ग्रह से ही आपके पुनर्जन्म के निवास स्थान के बारे में पता चलता है।
जातक की दिशा का ज्ञान जरूरी
किसी भी जातक की पुनर्जन्म की दिशा का ज्ञान उस जातक की कुंडली के पंचम भाव में स्थित राशि के अनुसार पता चलता है।
पुनर्जन्म और जातक की जाति
जातक की पुनर्जन्म के जाति का पता भी जातक की कुंडली में उसके पंचमेश ग्रह की जाति से पता चलता है अर्थात पंचमेश ग्रह की जो जाति आपकी कुंडली में है वो जाति जातक की पिछले जन्म में थी।

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