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अगहन अमावस्या से जु़डी 10 खास बातें

अगहन अमावस्या से जु़डी 10 खास बातें


पवित्र स्नान का महत्व:

इस दिन गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना पुण्यदायी माना जाता है। अगर नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी फलदायी होता है।


पितरों का तर्पण:

अगहन अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। यह पितरों के आशीर्वाद प्राप्त करने का उत्तम समय है।


दान-पुण्य का महत्व:

इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन और तिल दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान सात जन्मों तक फल देता है।


व्रत और उपवास:


अगहन अमावस्या पर व्रत रखने से आत्मिक शुद्धि होती है। यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए किया जाता है।


श्रीहरि विष्णु की पूजा:


इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। उनके मंत्रों का जप करने और भोग अर्पित करने से आशीर्वाद मिलता है।


शिव और शनि की आराधना:


भगवान शिव और शनि देव की उपासना इस दिन के प्रभाव को और अधिक बढ़ा देती है। शनि देव को तिल और सरसों का तेल चढ़ाने से शनि दोष शांत होता है।


कृषि का महत्व:

अगहन माह को "मार्गशीर्ष" भी कहा जाता है। यह समय किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह नई फसलों के आगमन का संकेत देता है।


आध्यात्मिक जागृति:


अगहन अमावस्या पर ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

पवित्र दीपदान:

इस दिन नदी किनारे या घर के आंगन में दीप जलाने से अंधकार दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

अन्नकूट उत्सव:


कई जगहों पर इस दिन अन्नकूट का आयोजन होता है, जिसमें भगवान को विविध प्रकार के अन्न और भोग अर्पित किए जाते हैं।

धार्मिक मान्यताएं

अगहन अमावस्या पर किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह दिन व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मकता को आमंत्रित करने का समय होता है।

शुभ मुहूर्त और पूजा विधि


अगहन अमावस्या पर सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद भगवान विष्णु और पितरों की पूजा करें। दान करने से पहले अपने सामर्थ्य के अनुसार वस्तुएं चुनें और पितरों का तर्पण करना न भूलें।

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