..तो पूजा-प्रयोग-ज्योतिष की उपयोगिता क्या है

मुंबई. अगर भाग्य को बदला नहीं जा सकता है तो पूजा-प्रयोग-ज्योतिष शास्त्र की क्या उपयोगिता है
यह वैसा ही सवाल है कि- यदि नजारा बदला नहीं जा सकता है तो नजरों की क्या उपयोगिता है!
माना कि हम नजारा नहीं बदल सकते, लेकिन नजरिया तो बदल सकते हैं, हम धूप को नहीं बदल सकते हैं मगर धूप का चश्मा लगा कर धूप की परेशानी तो कम कर सकते हैं, अगर हमें साफ नजर नहीं आ रहा है तो नंबर का चश्मा लगा कर साफ देख तो सकते हैं,
ठीक वैसे ही, पूजा-प्रयोग-ज्योतिष के सहयोग से हम ऋणमुक्त नहीं हो सकते लेकिन ऋण से राहत तो मिल सकती है.
उदाहरण के लिए बैंकवाले आ कर खड़े हो जाएं कि अभी-के-अभी ऋण के एक लाख रुपए चुकाओ, तो हालत खराब हो जाएगी, लेकिन वही बैंकवाले इस बात के लिए राजी हो जाएं कि पांच-पांच हजार की किश्त देकर लोन चुकता करो, तो तुरंत ऋण से राहत मिल जाएगी. ऋण वही एक लाख है, ऋण से मुक्ति नहीं मिली है, ऋण से राहत मिली है.
पूजा-प्रयोग-ज्योतिष शास्त्र की यही उपयोगिता है.
ज्योतिष शास्त्र हमें जीवन यात्रा का नक्शा उपलब्ध करवाता है, इसका यह फायदा है कि कहां तेजी से आगे बढ़ना है, कहां धीमी गति से चलना है और कहां विकट मोड़ पर सतर्कता रखनी है, इसकी जानकारी मिल सकती है, तो.... पूजा-अर्चना से अज्ञात खतरों से रक्षा होती है.
जिस तरह शरीर विज्ञान का जानकार डॉक्टर हर व्यक्ति को पहलवान नहीं बना सकता है, वैसे ही ज्योतिष शास्त्र का जानकार ज्योतिषी हर व्यक्ति को धनवान नहीं बना सकता है, यदि किसी व्यक्ति में पहलवान बनने के गुण मौजूद हैं तो डॉक्टर के सहयोग से वह अच्छा पहलवान बन सकता है, वैसे ही जिसकी जन्म कुंडली में धनवान बनने के योग हैं, उसे ज्योतिषी अच्छी राह दिखा सकता है.
पूजा-प्रयोग-ज्योतिष शास्त्र से चमत्कार की उम्मीद नहीं रखेंगे तो इसका वास्तविक फायदा नजर आएगा!
-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर

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