विजया एकादशी कब है, दशमी से द्वादशी तक व्रत की परंपरा और महत्व

फाल्गुन मास में आने वाली एकादशी तिथियों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। फरवरी 2026 में फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी और शुक्ल पक्ष की रंगभरी एकादशी पड़ रही है। विजया एकादशी का संबंध भगवान विष्णु और भगवान राम से जोड़ा जाता है, जबकि रंगभरी एकादशी का संबंध होली और काशी की परंपराओं से है। इस वर्ष विजया एकादशी महाशिवरात्रि से ठीक पहले आ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। विजया एकादशी 2026 की तिथि और समय फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी 2026 को दिन में 11 बजकर 07 मिनट से प्रारंभ होगी और 13 फरवरी 2026 को दोपहर 1 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में विजय, आत्मबल और सकारात्मकता का संचार होता है। विजया एकादशी का धार्मिक महत्व शास्त्रों में विजया एकादशी को विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि भगवान राम ने भी लंका विजय से पूर्व इस एकादशी का व्रत किया था, जिससे उन्हें विजय प्राप्त हुई। यही कारण है कि इस एकादशी को �विजया� कहा गया। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि यह व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इसे श्रद्धा से करने वाले भक्तों के जीवन में कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त होती है। दशमी से द्वादशी तक व्रत की परंपरा एकादशी व्रत की परंपरा दशमी तिथि से प्रारंभ मानी जाती है। दशमी के दिन प्रातःकाल स्नान कर संयम और शुद्ध आचरण का पालन किया जाता है। इस दिन मन और इंद्रियों को नियंत्रित रखते हुए भगवान विष्णु का स्मरण किया जाता है। एकादशी के दिन प्रातःकाल भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा कर व्रत का संकल्प लिया जाता है और दिनभर संयम के साथ भगवान नारायण का ध्यान किया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार रात में जागरण और भक्ति भाव से भगवान का स्मरण किया जाता है। द्वादशी के दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत का पारण किया जाता है। विजया एकादशी पर बन रहे ज्योतिषीय संयोग वर्ष 2026 की विजया एकादशी पर मूल नक्षत्र और जयद योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक दृष्टि से इन योगों को विशेष माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे संयोगों में किया गया व्रत और पूजा अधिक प्रभावकारी मानी जाती है और साधक को मानसिक दृढ़ता प्राप्त होती है। रंगभरी एकादशी 2026 कब है फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी, जिसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, 27 फरवरी 2026 को पड़ेगी। आमलकी एकादशी की तिथि 26 फरवरी की रात 12 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर 27 फरवरी को रात 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इस एकादशी का विशेष संबंध काशी और खाटू श्याम से माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन होली के उत्सव की शुरुआत का संकेत देता है और फाल्गुन मास के उल्लास से जुड़ा हुआ है। विजया एकादशी और रंगभरी एकादशी, दोनों ही तिथियां फाल्गुन मास में आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक आस्था को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती हैं। इन व्रतों को परंपरा और श्रद्धा के साथ करने से भक्तों में संयम, आत्मविश्वास और भक्ति भाव का विकास होता है।

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