Others I Posted on 17-10-2026 ,05:46:33 I by:
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली और अपने भक्तों को भय से मुक्ति दिलाने वाली देवी हैं। उनका स्वरूप भले ही उग्र माना जाता है, लेकिन वे अपने भक्तों पर कृपा बरसाने वाली हैं। मान्यता है कि उनकी आराधना से जीवन की परेशानियों का सामना करने का साहस मिलता है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन पूजा-अर्चना के साथ मां को गुड़ और गुड़ से बनी वस्तुओं का भोग लगाने की परंपरा है।
मां कालरात्रि पूजा का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इस अवधि के कारण सप्तमी तिथि दोनों दिन पड़ रही है। पूजा का दिन तय करते समय स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए।
17 अक्टूबर के लिए बताए गए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 40 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है। अमृत काल का मुहूर्त उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
मां कालरात्रि का स्वरूप और धार्मिक महत्व
मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और उग्र बताया गया है। धार्मिक वर्णन के अनुसार, उनका रंग श्याम यानी काला है और उनके बाल खुले रहते हैं। वे गर्दभ यानी गधे पर सवार रहती हैं। उनके स्वरूप में लंबे होंठ, कानों में आभूषण और शरीर पर तेल का लेप होने का उल्लेख मिलता है। उनके बाएं पैर में लोहे के कांटों जैसे आभूषण सुशोभित बताए गए हैं।
मां कालरात्रि को दुष्ट शक्तियों का विनाश करने वाली देवी माना जाता है। नवरात्रि में उनकी पूजा का उद्देश्य भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना करना है। भक्त उनसे परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
सप्तमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ करें। यदि घर में कलश स्थापना की गई है, तो सबसे पहले कलश की पूजा करें। इसके बाद मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें।
मां को रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें। इसके बाद गुड़ या गुड़ से बनी वस्तुओं का भोग लगाएं। घी का दीपक और अगरबत्ती जलाकर मां का स्मरण करें। श्रद्धानुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें। पूजा के अंत में आरती करें और परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य तथा कल्याण की प्रार्थना करें।
मां कालरात्रि को क्या भोग लगाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाना विशेष माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार गुड़ से तैयार पकवान अर्पित कर सकते हैं। मान्यता है कि मां को भोग लगाने और सच्चे मन से पूजा करने से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना पूरी होती है।
मां कालरात्रि के प्रमुख मंत्र
प्रार्थना मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इन मंत्रों का जाप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया जाता है। भक्त पूजा के दौरान मां के स्वरूप का ध्यान करते हुए उनसे साहस, शांति और संकटों का सामना करने की शक्ति देने की प्रार्थना करते हैं।
मां कालरात्रि का ध्यान मंत्र
करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम्॥
दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम्॥
महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥
मां कालरात्रि स्तोत्र
हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥
मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय-जय महाकाली। काल के मुंह से बचानेवाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखनेवाली। दुष्टों का लहू चखनेवाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली मां जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि मां तेरी जय॥
डिस्क्लेमर-यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग में दी गई जानकारियों पर आधारित है। तिथि और पूजा के मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। पूजा का समय निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग से जानकारी अवश्य लें।