तिल सकट चौथ कल, मिलता है साल की सभी चतुर्थियों का फल

मंगलवार 10 जनवरी को माघ महीने की तिल सकट चौथ है, जिसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। धर्माचार्यों का कहना है कि इस चतुर्थी का व्रत करने से वर्ष की समस्त चतुर्थियों का फल मिलता है। पद्म पुराण के मुताबिक इस व्रत के बारे में भगवान गणेश ने ही मां पार्वती को बताया था।

पद्म पुराण के मुताबिक इस तिथि पर कार्तिकेय के साथ पृथ्वी की परिक्रमा लगाने की प्रतिस्पर्धा में भगवान गणेश ने पृथ्वी की बजाय भगवान शिव-पार्वती की सात बार परिक्रमा की थी। तब शिवजी ने प्रसन्न होकर देवताओं में प्रमुख मानते हुए उनको प्रथम पूजा का अधिकार दिया था।

सकट चतुर्थी पर महिलाएं सुख-सौभाग्य, संतान की समृद्धि और परिवार के कल्याण की इच्छा से व्रत रखती हैं। व्रत में पानी में तिल डालकर नहाया जाता है। फलाहार में तिल का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही गणेशजी की पूजा भी तिल से की जाती है और उन्हें तिल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। इसी के चलते इस चतुर्थी को तिलकुट चतुर्थी, तिल चौथ भी कहा जाता है।

माघ महीने की शुरुआत होते ही मौसम में बदलाव होने लगते हैं। इस चतुर्थी तिथि पर व्रत करने और तिल के इस्तेमाल से शरीर में जरूरी पौष्टिक चीजों की कमी दूर हो जाती है। साथ ही इससे पाचन क्रिया मजबूत होती है।द्ध

दूर होते हैं ग्रह दोष
सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा करने से ग्रहों का अशुभ प्रभाव कम होता है। गणेश जी की पूजा से बुध, राहु और केतु से होने वाले कुंडली के दोष दूर होते हैं। गणेश जी को बुद्धि और ज्ञान के देवता माना गया है। इसलिए इस दिन गणेशजी की पूजा और व्रत करने से संतान की शिक्षा में आ रही रूकावटें दूर होती हैं। साथ ही सेहत अच्छी रहती है और समृद्धि भी बढ़ती है।

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