यहां हैं 800 से ज्यादा मूर्तियां, ब़डे पत्थरों को काटकर बनाया गया है खुजराहो का ये मंदिर

छतरपुर। देश के हर हिस्से में महादेव को समर्पित बड़े और विशाल मंदिर हैं, जहां अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भक्त लंबे समय से आते रहे हैं। शिव के बारह ज्योतिर्लिंग के प्रति हर भक्त की आस्था बड़ी है, लेकिन खजुराहो में भगवान शिव का ऐसा मंदिर है जो कला और संस्कृति के साथ मनोकामना पूर्ति के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हम बात कर रहे हैं कंदरिया महादेव मंदिर की, जिसका हर पत्थर महादेव का गुणगान करता है। मध्य भारत के खजुराहो मंदिर स्थल पर बचे हुए मंदिरों में सबसे बड़े और सबसे ऊंचे मंदिरों में शामिल कंदरिया महादेव मंदिर न सिर्फ आस्था की दृष्टि से, बल्कि कला और संस्कृति के नजरिए से भी खास है। मंदिर के बड़े गर्भगृह में भगवान शिव की लिंग स्वरूप पूजा की जाती है। मंदिर पर हुए आक्रमणों की वजह से भी मंदिर इतिहास के पन्नों में दर्ज है, लेकिन सबसे खास है मंदिर को बनाने की इंटरलॉकिंग तकनीक। इंटरलॉकिंग तकनीक से तात्पर्य मंदिर की आर्किटेक्चर से है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि मंदिर पर उकेरी गई हर प्रतिमा एक दूसरे में उलझी हुई है। यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन सी प्रतिमा कहां से शुरू होती है और कहां खत्म। मंदिर होने के बावजूद भी मंदिर की दीवारों पर खजुराहो की संस्कृति भी देखने को मिलती है। मंदिर की दीवारों से मंदिर के भीतर 800 से ज्यादा प्रतिमाएं पत्थरों पर बारीकी से उकेरी गई हैं, और यही मंदिर की सबसे अद्भुत बात है। मंदिर पर उकेरी गई प्रतिमाओं को इतनी बारीकी से उकेरा गया है कि साड़ी की सिलवटें, नाखून और आभूषणों की चमक को देखा जा सकता है। यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। खास बात ये है कि मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थर की चट्टान से किया गया है और देखने पर ऐसा लगता है कि मंदिर के निर्माण में एक ही विशाल चट्टान का इस्तेमाल किया गया है। कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण चंदेल राजा विद्याधर ने महमूद गजनवी को दूसरी बार हराने के बाद किया था और इसे उनकी जीत का प्रतीक माना गया। मंदिर इतना बड़ा और इस तरीके से बनाया गया है कि जब सुबह सूरज की पहली किरण मंदिर पर पड़ती है, तो मंदिर सोने की तरह चमक उठता है और एक दिव्य और शक्तिशाली ऊर्जा शरीर में महसूस होती है।

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