Others I Posted on 12-10-2026 ,04:57:02 I by:
शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन सोमवार, 12 अक्टूबर को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जा रही है। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से भक्तों को धैर्य, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि के इस दिन मां को श्रद्धापूर्वक पुष्प, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती। तपस्या और संयम का संदेश देता है मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
मां ब्रह्मचारिणी, मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। उनके एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका स्वरूप साधना, तपस्या और आत्मसंयम का संदेश देता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी तपस्विनी स्वरूप के कारण उन्हें मां ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों को धैर्य, मानसिक शांति और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रेरणा मिलती है। उनकी आराधना जीवन में अनुशासन बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों में अपने लक्ष्य पर टिके रहने का संदेश भी देती है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें। माता को पुष्प, अक्षत, चंदन और रोली अर्पित करें। फिर धूप-दीप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। अंत में माता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति तथा खुशहाली की प्रार्थना करें। पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता का विशेष ध्यान रखें।
मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा मौसमी फल भी भोग में शामिल किए जा सकते हैं। माता को भोग लगाते समय मन में श्रद्धा और समर्पण का भाव रखें।
पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है। नवरात्रि में भोग अर्पित करने की परंपरा भक्तों की आस्था और देवी के प्रति समर्पण से जुड़ी हुई है।
मां ब्रह्मचारिणी के पूजा मंत्र
मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है।
दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
इस मंत्र का भाव है कि जिन देवी के हाथों में जपमाला और कमंडल सुशोभित हैं, वे उत्तम ब्रह्मचारिणी माता मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें।
मां ब्रह्मचारिणी का सरल मंत्र भी श्रद्धापूर्वक जप सकते हैं।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
इसके अलावा देवी की आराधना में इस मंत्र का भी पाठ किया जाता है।
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के बाद उनकी आरती करने की परंपरा है। आरती के दौरान माता का स्मरण कर उनसे सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।
जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा॥
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता॥
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए॥
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम॥
नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों को तप, त्याग और संयम के महत्व की याद दिलाता है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ यह अवसर अपने विचारों को सकारात्मक बनाने, धैर्य रखने और जीवन में अनुशासन अपनाने की प्रेरणा भी देता है।