Others I Posted on 28-10-2026 ,06:17:42 I by:
हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू होता है और शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। इस वर्ष करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा की तैयारी में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पूजन सामग्री पहले से जुटा लेना अच्छा रहता है। करवा, दीपक, रोली, अक्षत और व्रत कथा की पुस्तक से लेकर सोलह शृंगार तथा बायने की सामग्री तक कई चीजों की आवश्यकता होती है। आइए जानते हैं करवा चौथ की पूजा के लिए किन-किन वस्तुओं को अपनी तैयारी में शामिल करना चाहिए।
करवा चौथ की पूजा के लिए जरूरी सामग्री
करवा चौथ की पूजा में करवा सबसे प्रमुख वस्तुओं में से एक है। इसके लिए मिट्टी या तांबे का करवा और उसे ढकने के लिए ढक्कन रखें। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सात या 13 सीकें, मिट्टी का दीपक, शुद्ध घी और रुई की बाती भी तैयार रखें। चंद्रमा तथा पति का चेहरा देखने के लिए छलनी की आवश्यकता होती है।
पूजा के लिए तांबे या पीतल का लोटा, रोली, कुमकुम, चंदन, बिना टूटे चावल यानी अक्षत और कलावा भी रखें। भगवान गणेश की पूजा के लिए दूर्वा तथा अन्य पूजन के लिए ताजे फूल और पुष्पमाला की व्यवस्था करें। इसके अलावा ऋतुफल, मिठाइयां और करवा चौथ की व्रत कथा की पुस्तक भी पूजा की सामग्री में शामिल करें।
सोलह शृंगार के लिए इन चीजों की करें तैयारी
करवा चौथ पर सोलह शृंगार का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सजती-संवरती हैं और अपने सुहाग की मंगलकामना करती हैं। ऐसे में शृंगार की सामग्री पहले से तैयार रखना सुविधाजनक रहता है।
सोलह शृंगार के लिए सिंदूर, लाल बिंदी, आलता या महावर और चूड़ियां रख सकती हैं। हाथों पर लगाने के लिए मेहंदी तथा पहनने के लिए साड़ी या लहंगा जैसे पारंपरिक वस्त्र तैयार रखें। आभूषणों में मंगलसूत्र, पायल, बिछिया, कानों के कुंडल, नथ और अपनी पसंद के अन्य गहने शामिल किए जा सकते हैं।
इसके साथ काजल, लिपस्टिक, नेल पॉलिश, इत्र और कंघी जैसी शृंगार की वस्तुएं भी रख लें। महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार शृंगार की तैयारी कर सकती हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए क्या रखें
करवा चौथ की पूजा में चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। इसके लिए जल से भरा लोटा या गड़वा तैयार रखें। चंद्रमा और पति का चेहरा देखने के लिए छलनी तथा उसे या पूजा स्थल को रोशन करने के लिए छोटा दीपक भी रखा जा सकता है।
करवे और लोटे पर बांधने के लिए कलावा भी साथ रखें। पूजा की इन वस्तुओं को पहले से एक जगह रख लेने से चंद्रमा निकलने के समय सामग्री जुटाने की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
करवा चौथ के बायने में क्या-क्या दें
करवा चौथ पर बायना या बाया देने की परंपरा भी प्रचलित है। इसमें सास या परिवार की किसी बुजुर्ग महिला को श्रद्धा और सम्मान के साथ भेंट दी जाती है। बायने की सामग्री परिवार की परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
इसमें आटे या मैदे से बने मीठे पुए, मठरी और शक्करपारे रखे जा सकते हैं। इसके साथ बादाम, काजू और किशमिश जैसे सूखे मेवे, फल और मिठाइयां भी शामिल की जाती हैं। कई परिवारों में बायने के साथ सुहाग का सामान, वस्त्र और दक्षिणा देने की परंपरा है। इसके अलावा मिट्टी या धातु का करवा भी भेंट में रखा जा सकता है।
बायना तैयार करते समय घर में चली आ रही रीति का ध्यान रखें। सामग्री का चयन अपनी श्रद्धा, परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है।
पूजा से पहले पूरी कर लें तैयारी
करवा चौथ के दिन पूजा और चंद्र दर्शन की तैयारियों में व्यस्तता रहती है। इसलिए करवा, दीपक, बाती, रोली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई और व्रत कथा की पुस्तक जैसी जरूरी वस्तुओं को एक दिन पहले ही व्यवस्थित कर लेना बेहतर है। इसी तरह सोलह शृंगार और बायने की सामग्री भी पहले से तैयार रखी जा सकती है।