मुख्य द्वार पर फिटकरी रखने से क्या सच में बदलती है घर की किस्मतक् जानिए वास्तु की मान्यताएं

घर का मुख्य द्वार और ऊर्जा का संबंध वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना गया है। माना जाता है कि यहीं से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाएं घर में प्रवेश करती हैं। इसी कारण मुख्य द्वार की साफ-सफाई और देखभाल को घर की शांति, समृद्धि और संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। मुख्य द्वार पर फिटकरी रखने की मान्यता वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार के पास फिटकरी रखने या उससे समय-समय पर सफाई करने से घर की ऊर्जा में सकारात्मक बदलाव महसूस किया जा सकता है। कहा जाता है कि फिटकरी एक क्रिस्टल की तरह कार्य करती है, जो आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को अपने भीतर समाहित कर लेती है और घर के अंदर उसके प्रभाव को कम करती है। नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से जुड़ी मान्यताएं मान्यता है कि फिटकरी भारी और नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर निष्क्रिय कर देती है। खासतौर पर उन घरों में जहां प्रवेश द्वार पर लोगों की आवाजाही अधिक रहती है, वहां इसे बुरी नजर और ईर्ष्या से पैदा होने वाली नकारात्मकता को कम करने वाला माना जाता है। वास्तुदोष और मानसिक शांति से जुड़ा विश्वास कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर कांच के जार में फिटकरी रखने से दिशा से जुड़े सूक्ष्म दोषों का प्रभाव कम हो सकता है। इसे घर में मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आपसी सद्भाव बनाए रखने में सहायक माना जाता है, जिससे तनाव और अनावश्यक कलह में कमी आने की बात कही जाती है। सेहत और नींद से जुड़ी धारणाएं फिटकरी के बारे में यह भी विश्वास है कि इसके एंटीसेप्टिक गुण वातावरण को शुद्ध करने में मदद करते हैं। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह बुरे सपनों, बेचैनी और नकारात्मक प्रभावों से बचाव में सहायक हो सकती है, जिससे नींद और मानसिक सुकून बेहतर होता है। फिटकरी से जुड़ा रखरखाव वास्तु मान्यताओं में यह कहा जाता है कि जब फिटकरी का रंग बदलने लगे, तो उसे बदल देना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि रंग बदलना इस बात का संकेत है कि फिटकरी ने नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित कर लिया है। इसके बाद पुरानी फिटकरी को घर से बाहर फेंक देना बेहतर माना जाता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। हम यह दावा नहीं करते कि ये मान्यताएं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित या पूर्णतः सत्य हैं। किसी भी मान्यता को अपनाने से पहले अपनी परिस्थितियों के अनुसार स्वयं निर्णय लें।

Home I About Us I Contact I Privacy Policy I Terms & Condition I Disclaimer I Site Map
Copyright © 2026 I Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved I Our Team