यहां बुलाने पर आज भी साक्षात दर्शन देते है देवता!

पौडी गढवाल। एक जगह ऎसी भी जहां देवताओं का आह्वान करने पर वे साक्षात दर्शन देते है। जी हां, हम बात कर रहे है देवभूमि उत्तराखंड की। वैदिक परंपरा के अनुसार अपने पूर्वजों के इतिहास को इसी परंपरा ने ही आगे बढाया है और इसी तरह ही वेदों की रचना भी हुई है।

देवभूमि उत्तराखंड के जागर भी इसी परंपरा का हिस्सा है, जो हमारे स्थानीय इतिहास एवं महापुरूषों को हम तक अलिखित इतिहास के रूप में पहुंचाते हैं। कोटद्वार स्थित पौराणिक सिद्धबली धाम में देवभूमि उत्तराखंड के इस अलौकिक और अलिखित इतिहास का जब भी मिलन होता है, तो ये ऎतिहासिक दस्तावेज जीवित हो जाता है। देवभूमि उत्तराखंड के अलिखित इतिहास के रूप में जागर हमारी एक ऎसी ऎतिहासिक धरोहर है, जिसके गायन से स्थानीय देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है।

कोटद्वार स्थित सिद्धबली बाबा महोत्सव के आखिरी दिन जैसे ही इस अलिखित इतिहास का जागर विधा के धनी कहें जाने वाले मदन लाल ने गायन शुरू किया तो चारों ओर अलौकिक स्थितियों के रूप में दर्जनों लोगों पर स्थानीय देवी-देवता अवतरित हो गए। दरअसल देवभूमि उत्तराखंड की जागर एक ऎसी विधा है, जिसका न तो वेदों में जिक्र है और न ही इसका कोई लिखित प्रमाण है। बावजूद इसके देवभूमि में हजारों सालों से चली आ रही इस गौरवशाली विधा का जब भी गायन होता है, तो देवी-देवता खुद ही प्रकट होकर नाचने लगते हैं।

हालांकि देवभूमि उत्तराखंड की ये अलौकिक और ऎतिहासिक विधा अब धीरे-धीरे विलुçप्त के कगार पर पहुंच रही है लेकिन कोटद्वार स्थित सिद्धबली धाम इस विधा को फिर से जीवित करने के प्रयास में जुटा है और जागर गायन शैली के दक्ष लोगों को मंच देकर उनको आगे बढ़ा रहा है। सिद्धबली मंदिर के महंत दलीप रावत की यदि मानें तो हर साल वो जागरों के आयोजन से जनता को ये बताने का प्रयास करते हैं कि आज भी देवभूमि उत्तराखंड में अलौकिक शक्तियां मौजूद हैं।

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