रामायण की इन चौपाइयों से होते हैं सब क्लेश दूर

रामायण के पठन से यूं तो जीवन सुखी रहता है लेकिन कुछ खास चौपाइयां का यदि नियमित पठन किया जाए तो दुख-क्लेश दूर होते हैं और घर में सम्पन्नता आती है।


अकाल मृत्यु भय व संकट दूर करने के लिए
नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।
शत्रुता मिटाने के लिए
बयरु न कर काहू सन कोई।
राम प्रताप विषमता खोई॥
सभी तरह के संकटनाश या भूत बाधा दूर करने के लिए
प्रनवउ पवन कुमार, खल बन पावक ग्यान घन।
जासु ह्रदय आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥
नौकरी पाने के लिए
बिस्व भरण पोषन कर जोई।
ताकर नाम भरत जस होई।।
धन-दौलत, सम्पत्ति पाने के लिए
जे सकाम नर सुनहि जे गावहि।
सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।
योग्य संतान पाने के लिए
प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।
शादी के लिए
तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु ब्याह साजि संवारि कै।
मांडवी श्रुतकीरति उर्मिला, कुँअरि लई हँकारि कै॥
नजर उतारने के लिए
स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी।
निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।
हनुमानजी की कृपा के लिए सुमिरि पवनसुत पावन नामू।
अपने बस करि राखे रामू।।
सफल व कुशल यात्रा के लिए
प्रबिसि नगर कीजै सब काजा।
ह्रदय राखि कोसलपुर राजा॥
बीमारियां व अशान्ति दूर करने के लिए
दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥
खोई वस्तु या व्यक्ति पाने के लिए
गई बहोर गरीब नेवाजू।
सरल सबल साहिब रघुराजू।।
पढ़ाई या परीक्षा में कामयाबी के लिए
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी।
कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती।
जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥

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