आज इस धातु की बरतन खरीदने से बरसेगा लक्ष्मीजी का आशीर्वाद

धनतेरस के दिन चांदी-सोने के अलावा यदि इस धातु के बरतन खरीदें जाएं तो न केवल घर में सुख शांति आती है बल्कि लक्ष्मी की भी मेहरबानी बनी रहती है।


भगवान धनवंतरी नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो भुजाओं में वे शंख और चक्र धारण किए हुए हैं। दूसरी दो भुजाओं में औषधि के साथ वे अमृत कलश लिए हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि यह अमृत कलश पीतल का बना हुआ है क्योंकि पीतल भगवान धनवंतरी की प्रिय धातु है। इसलिए दिवाली के पूर्व धनतेरस के दिन लोग अपने घरों में नए पीतल के बर्तन खरीदकर लाते हैं।
धनतेरस के दिन चांदी के बर्तन या जेवर खरीदने का भी प्रचलन है। माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है, जो शीतलता प्रदान करता है और इसी दिन चन्द्र का हस्त नक्षत्र भी है। इस दिन चांदी की खरीदी गई कोई भी वस्तु शुभ फल प्रदान करती है और लंबे समय तक चलती है। सभी लोग चांदी के बर्तनों का प्रयोग घर पर रेगुलर यूज के लिए नहीं कर सकते। इन्हीं कारणों से लोग धनतेरस के दिन चांदी की जगह स्टील के बर्तन खरीदते हैं।
ऐसा माना जाता है कि स्टील के बर्तन भी चांदी की तरह स्वच्छ और शुद्ध होते हैं। जिसे खाने को परोसकर खाया जा सकता है।
धनतेरस पर धनिए के बीज खरीद कर रखना भी शुभ माना जाता है क्योंकि दिवाली के बाद इन बीजों को लोग अपने खेतों में बोते हैं। कुछ लोग क्यारियों में भी बोते है। धनिया स्वास्थ्य के लिए उत्तम तो होता ही है, इसे स्वाद को बढ़ाने वाला भी माना गया है।

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