अगर आपकी कुंडली में राहु तृतीय, षष्ठम और एकादश भाव में है तो समझों ...

ग्रहों के हेरफेर से ही व्यक्ति के जीवन में कई सारे बदलाव होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की किस्मत का सारा लेखा जोखा उसकी कुंडली में बना होता है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो कुल 9 ग्रह होते हैं जो कुंडली में अदल बदल करते हैं। इन 9 ग्रहों में से दो ग्रह होते हैं राहू व केतु जिसे अशुभ माना जाता है। वैसे तो राहु का नाम सुनकर हमेशा घबराना नहीं चाहिए क्योंकि कई बार राहु आपकी किस्मत बदलने का काम भी करता है। यह तो आपको अब समझ आ ही गया होगा।

ज्योतिषियों की मानें तो अगर आपके धड़ के ऊपर के हिस्से में किसी प्रकार की स्वास्थ्य की शिकायत है तो ये राहु का प्रकोप हो सकता है। अगर धड़ के निचले हिस्से से लेकर पैर तक कोई भी विकार हो तो हो सकता है इसके लिए केतु जिम्मेदार हो।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कहा जाता है कि राहु सिर है तो केतु धड़ है। लेकिन शायद आपको यह पता नहीं होगा कि राहु की वजह से भी कई बार लोगों की किस्मत चमक जाती है पर बशर्ते कुंडली में वैसी स्थिति बननी चाहिए।

सबसे पहले तो आपको बता दें कि जिनकी कुंडली में शनि के साथ राहु स्थित हो तो वो व्यक्ति बेहद ही शांत व रहस्यमयी स्वभाव का होता है। ऐसे लोग अपनी क्षमता से ज्यादा धन और संपदा एकत्र करते हैं।

कुंडली में जब शनि, शुक्र व बुध लग्न भाव के स्वामी होते हैं तो राहु शुभ फल दे सकता है। राहु इन ग्रहों का मित्र है।

इतना ही नहीं अगर कुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल या चंद्रमा लग्न भाव के स्वामी हैं तो राहु से अशुभ फल मिल सकते हैं। राहु का इन चारों ग्रहों के साथ शत्रुता है।

अगर किसी भी व्यक्ति के कुंडली में राहु तृतीय, षष्ठम और एकादश भाव में है तो व्यक्ति के लिए राहु शुभ होता है। वैसे इन सब के अलावा यह भी बता दें कि राहु लग्न, पंचम, नवम, दशम में सामान्य फल देता है।
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